ओइलर मसूद आलम ने कहा, "हमने 50 दिन जेल(US-इज़राइल बनाम ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के चलते ईरान जेल) में बिताए थे। हमारे परिवार के सभी लोग बहुत परेशान थे। हमने दुबई से जॉइन किया था और हम यमन से डीजल डिस्चार्ज करके आ रहे थे। हम ईरान में रुके हुए थे और दूसरे जहाज की मदद के लिए जा रहे थे। नेवी आई और उन्होंने फायरिंग करना शुरू कर दिया.ईरान की जेल में हमें यातना नहीं दी गई थी. हम वहां बहुत दुखी थे.जेल से निकलने के बाद हमने अपने पैसे लगाकर टैक्सी के जरिए 1800 किलोमीटर का सफर तय किया.भारतीय दूतावास और भारत सरकार ने हमें अच्छा समर्थन दिया था. हमें अपने देश आकर बहुत अच्छा लग रहा है
भारतीय नाविक कप्तान विजय कुमार ने कहा, "वहां(ईरान) गुजारा गया वक्त बहुत दर्दनाक था जब युद्ध(US-इज़राइल बनाम ईरान के बीच चल रहा संघर्ष) शुरू हुआ तो शुरू में तो कुछ समझ ही नहीं आया था हमने भारतीय दूतावास से बात की, उन्हें बताया कि हम 5 लोग हैं और हम यहां फंसे हुए हैं.हमारे पास पैसे नहीं थे। हमें एक टैक्सी मिली जिसने हमसे 3000 डॉलर मांगे.तकरीबन 1800 किलोमीटर तक का सफर हमने टैक्सी से तय किया.वहां ऐसे भी दिन आए थे जब हमने खाना नहीं खाया था.मैं सरकार का धन्यवाद करूंगा कि उन्होंने हमारा इतना समर्थन किया
इस्राइल–ईरान तनाव और संभावित युद्ध जैसी स्थिति के बीच Iran की जेलों में बंद कैदियों ने बेहद खौफनाक हालात का खुलासा किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कैदियों का कहना है कि देश में बढ़ते सुरक्षा दबाव और बाहरी संघर्ष के डर के चलते जेल प्रशासन का रवैया और सख्त हो गया है। कई कैदियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है, जिसमें पर्याप्त खाना, साफ पानी और चिकित्सा सुविधा शामिल हैं।
कैदियों के मुताबिक, जैसे-जैसे Israel के साथ तनाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे जेलों में निगरानी और नियंत्रण भी बढ़ा दिया गया है। उन्होंने बताया कि जेलों में अचानक तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं, कैदियों को बिना किसी स्पष्ट कारण के अलग-थलग रखा जा रहा है और कई बार उनके परिवारों से संपर्क भी सीमित कर दिया जाता है। इससे कैदियों में डर और मानसिक दबाव काफी बढ़ गया है।
कुछ कैदियों ने यह भी दावा किया कि उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि पूछताछ के नाम पर दबाव बनाया जाता है और कई बार कठोर व्यवहार किया जाता है। इन खुलासों के बाद मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी परिस्थिति में कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार नहीं होना चाहिए, चाहे देश किसी भी तरह के बाहरी संकट से गुजर रहा हो।