इंडिगो एयरलाइंस द्वारा देश भर में बड़े पैमाने पर उड़ानों को रद्द किए जाने से यात्रियों की परेशानी काफी बढ़ गई है। यह संकट मुख्य रूप से पायलटों की कमी (Crew Shortage) और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के नए उड़ान ड्यूटी समय सीमा (FDTL) नियमों को लागू करने में एयरलाइन की योजनागत कमियों के कारण उत्पन्न हुआ है। नए FDTL नियमों में पायलटों के लिए साप्ताहिक विश्राम का समय बढ़ाना और रात की ड्यूटी के दौरान लैंडिंग की संख्या को सीमित करना शामिल है, जिसका उद्देश्य उड़ान सुरक्षा को मजबूत करना है। इंडिगो ने इन नियमों के तहत आवश्यक कर्मचारियों की संख्या का सही अनुमान नहीं लगाया, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंसे हुए हैं, जिससे अफरा-तफरी का माहौल है। दिल्ली हवाई अड्डे से इंडिगो की सभी उड़ानें एक दिन के लिए रद्द कर दी गईं, जिससे संकट और गहरा गया। यात्रियों को 10-14 घंटे या उससे भी अधिक समय तक हवाई अड्डों पर इंतजार करना पड़ा है। कई यात्रियों ने भोजन और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत की है। वरिष्ठ नागरिकों और शिशुओं वाले यात्रियों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
उड़ानों के अचानक रद्द होने या अत्यधिक देरी के कारण यात्रियों के व्यक्तिगत और व्यावसायिक यात्रा कार्यक्रम बाधित हुए हैं, महत्वपूर्ण बैठकों और आगे की यात्रा के कनेक्शन छूट गए हैं। इंडिगो की उड़ानों के रद्द होने से बाजार में अन्य एयरलाइनों के टिकटों की मांग बढ़ गई है, जिससे हवाई किराए में भारी उछाल आया है, जो आम यात्रियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रहा है।
कई यात्रियों ने समय पर रिफंड या वैकल्पिक उड़ानों की री-बुकिंग में समस्याओं का सामना किया है, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ गई है। इंडिगो ने इस अव्यवस्था के लिए माफी मांगी है और यात्रियों को रिफंड, री-बुकिंग, होटल में ठहरने और भोजन जैसी सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है। DGCA ने इस मामले का संज्ञान लिया है और इंडिगो से इस संकट को जल्द से जल्द हल करने के लिए एक ठोस योजना मांगी है। एयरलाइन को उम्मीद है कि 10 फरवरी 2026 तक परिचालन पूरी तरह से सामान्य हो जाएगा, लेकिन यात्रियों को दिसंबर के मध्य तक और व्यवधानों का सामना करना पड़ सकता है।