पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासन में एक बार फिर बड़े ऐलानों का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कल्याणी में आयोजित एक अहम प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद राज्य की जनता के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं और फैसलों का एलान किया। महिलाओं की आर्थिक मदद से लेकर गरीबों के भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुधार तक सरकार ने कई बड़े कदम उठाने की घोषणा की है।
सबसे बड़ी घोषणा ‘अन्नपूर्णा योजना’ को लेकर की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार 27 मई से इस योजना के फॉर्म बांटना शुरू करेगी। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि भारत का कोई भी नागरिक इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होगा। योजना के फॉर्म राज्य सचिवालय से प्राप्त किए जा सकेंगे।
सरकार का दावा है कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और घरेलू स्तर पर उनकी भागीदारी को बढ़ाना है। माना जा रहा है कि आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह योजना राज्य सरकार की बड़ी सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुधार को लेकर भी बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि अब स्कूल, कॉलेज और किसी भी धार्मिक स्थल के एक किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानें खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे शिक्षण संस्थानों का माहौल बेहतर रहेगा और धार्मिक स्थलों की पवित्रता भी बनी रहेगी।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब लंबे समय से स्कूलों और मंदिरों के आसपास शराब की दुकानों को लेकर सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की तरफ से विरोध उठता रहा है। सरकार अब इसे सामाजिक अनुशासन और जनहित से जोड़कर देख रही है।
गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए भी राज्य सरकार ने विशेष योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पूरे राज्य में लगभग 400 विशेष कैंटीन खोली जाएंगी। इन कैंटीनों में लोगों को हफ्ते में दो दिन मात्र 5 रुपये में मछली और चावल का भरपेट भोजन मिलेगा।
बंगाल की राजनीति में मछली और चावल सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा भी माने जाते हैं। ऐसे में सरकार की यह योजना सीधे आम लोगों से जुड़ने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। सरकार का कहना है कि महंगाई के दौर में गरीबों को सस्ती दर पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब AYUSH यानी आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी से जुड़ी सेवाओं के लिए अलग विभाग बनाया जाएगा। अभी तक AYUSH स्वास्थ्य विभाग का हिस्सा था, लेकिन अब इसे स्वतंत्र विभाग के रूप में पहचान दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को वैकल्पिक स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर तरीके से मिल सकेंगी।
ये सभी घोषणाएं कल्याणी में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान की गईं। बैठक में नदिया, उत्तर 24 परगना और हुगली जिलों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की गई। सरकारी योजनाओं की प्रगति, बुनियादी ढांचे के काम और प्रशासनिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार भी मौजूद रहीं। उनके साथ देगंगा, स्वरूपनगर और हरोआ के विधायक भी शामिल हुए। काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि प्रशासन सभी लोगों के लिए समान रूप से काम करता है और सरकार का लक्ष्य हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य सिर्फ घोषणाएं करना नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर तेजी से लागू करना है। आने वाले दिनों में राज्य सरकार इन योजनाओं को लेकर बड़े स्तर पर अभियान भी शुरू कर सकती है।
अब देखना होगा कि महिलाओं को आर्थिक सहायता, सस्ता भोजन, सामाजिक सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े ये फैसले जनता के बीच कितना असर छोड़ते हैं और विपक्ष इन योजनाओं को किस नजर से देखता है।