धार भोजशाला परिसर पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर माना है और हिंदू पक्ष में फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। क्या यह फैसला काशी और मथुरा के मामलों में भी नई कानूनी बहस को जन्म देगा?
Asaduddin Owaisi ने Bhojshala को लेकर आए अदालत के फैसले और सर्वे संबंधी घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने इस मामले की तुलना Babri Masjid demolition विवाद से करते हुए कहा कि देश में धार्मिक स्थलों को लेकर एक खतरनाक परंपरा बनाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठनों द्वारा पुराने धार्मिक स्थलों के इतिहास को आधार बनाकर नए विवाद खड़े किए जा रहे हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
ओवैसी ने कहा कि अगर हर मस्जिद और धार्मिक स्थल के इतिहास को खंगालकर विवाद शुरू किए जाएंगे, तो इससे देश में लगातार तनाव बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों को ऐसे मामलों में बेहद सावधानी बरतनी चाहिए ताकि किसी समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा न हो। AIMIM प्रमुख ने बयान देते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद मामले के बाद देश को सबक लेना चाहिए था, लेकिन अब फिर उसी तरह के मुद्दों को हवा दी जा रही है।
दरअसल, भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का मंदिर बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है। अदालत के आदेश के बाद परिसर का सर्वे कराया गया, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। हिंदू संगठनों ने सर्वे को ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़ा कदम बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे धार्मिक विवाद को बढ़ाने वाला कदम कहा है।
ओवैसी के बयान पर कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने उनके बयान को भड़काऊ बताया, जबकि समर्थकों का कहना है कि उन्होंने संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों से जुड़ी चिंता जाहिर की है। फिलहाल भोजशाला मुद्दा राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है, और सभी पक्ष अदालत के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।