AAP नेता गोपाल राय ने कहा, "भाजपा ने जिस तरह से प्रदूषण की समस्या पर काम किया है, वही अपने आप में बहुत से सवाल खड़े करता है। जब प्रदूषण का स्तर कम था तब GRAP-3 लागू था और आज AQI बढ़ गया तो GRAP हटा दिया गया है. सरकार ने अपनी सक्रियता के बजाय AQI को गड़बड़ कर दिया है.आज मंत्री अपने कमरों में बैठे हैं... आज कहीं कोई कार्रवाई नहीं हो रही है.दिल्ली में जनता को जागरूक करने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है सुप्रीम कोर्ट को देखना चाहिए कि सरकार ने क्या कदम उठाए हैं
AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा, "आज दिल्ली वालों के मन में एक सवाल है। जब दिल्ली में AAP की सरकार थी तब जब प्रदूषण बढ़ता था तो कोर्ट उस पर कार्रवाई(Suo moto action) करती थी.क्या आज दिल्ली हाई कोर्ट को नहीं दिख रहा है कि सभी AQI मॉनिटरिंग स्टेशन पर पानी छिड़ककर फर्जी डेटा दिखाया जा रहा है.मेरा निवेदन है कि कोर्ट इन मामलों में कार्रवाई करे.इनके अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है, विशेष रूप से सर्दियों के महीनों (अक्टूबर से फरवरी) में स्थिति 'बहुत खराब' से 'गंभीर' या 'खतरनाक' श्रेणी तक पहुँच जाती है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर 301 से 400 ('गंभीर') और कई बार 400+ ('खतरनाक') को भी पार कर जाता है। इस प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं
प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। अस्पतालों में साँस संबंधी (रेस्पिरेटरी), एलर्जी और हृदय रोगों के मामलों में भारी वृद्धि देखी जा रही है। यह स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए जानलेवा बन जाती है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से फेफड़ों का कैंसर, सीओपीडी (COPD) और यहाँ तक कि डिमेंशिया जैसे न्यूरोलॉजिकल जोखिम भी बढ़ सकते हैं। प्रदूषण के कारण रोज़मर्रा की गतिविधियों, जैसे बाहरी व्यायाम और बच्चों के खेल, पर रोक लग जाती है, जिससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को लागू करता है। AQI के स्तर के आधार पर, यह योजना निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध, सड़कों पर पानी का छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन का उपयोग, और सबसे खराब स्थिति में, वर्क-फ्रॉम-होम की सलाह या आदेश जारी करने जैसे सख्त कदम उठाती है। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रिक वाहन नीति और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, तथा पराली प्रबंधन के लिए बायो-डीकंपोजर जैसी पहलों पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए शहर-आधारित समाधानों के बजाय पूरे 'एयरशेड' को ध्यान में रखकर निरंतर और कठोर उपायों की आवश्यकता है।