मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों के मन में भारत के प्रति आस्था और निष्ठा नहीं है तथा जो देश की संस्कृति और परंपराओं का सम्मान नहीं करते, उनके लिए भारत की भूमि कोई धर्मशाला नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का विरोध करने वालों को इतिहास में कभी सम्मानजनक स्थान नहीं मिला।
लव जिहाद और लैंड जिहाद के मुद्दे पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को इन चुनौतियों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना होगा। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली शक्तियां समय-समय पर जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर लोगों को विभाजित करने का प्रयास करती हैं, लेकिन भारत की संत परंपरा हमेशा समाज को जोड़ने और राष्ट्र को आगे बढ़ाने का कार्य करती रही है।
योगी ने कहा कि व्यासपीठ से जो संदेश दिया जाता है, उसके मूल भाव को समझना और जीवन में उतारना आवश्यक है। कथा केवल सुनने का विषय नहीं है, बल्कि उसके आदर्शों और मूल्यों को आत्मसात करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे कथा के संदेश को व्यवहार में अपनाकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें।