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BJP MLA Agnimitra Paul ON Mamata Banerjee:स्कूली बच्चों- महिला अपराध पर भाजपा विधायक का बड़ा खुलासा

वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Updated Thu, 20 Nov 2025 04:30 AM IST

भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल कहती हैं, "पश्चिम बंगाल में स्कूल छोड़ने वालों की संख्या सबसे ज़्यादा है। 7000 से ज़्यादा स्कूल बंद हो गए हैं। छात्र स्कूल छोड़ चुके हैं। उसके बाद किशोरावस्था में विवाह, बाल विवाह हो रहे हैं.बाल विवाह के साथ-साथ किशोरावस्था में गर्भधारण भी हो रहा है; इस मामले में हम शीर्ष 3 में शामिल हैं। महिलाओं पर अत्याचार के मामले में हम भारत में चौथे स्थान पर हैं। घरेलू हिंसा के मामलों में हम सबसे आगे हैं। अपहरण और तेज़ाब हमलों में भी हम सबसे आगे हैं। इसलिए, हमने महिलाओं पर अत्याचार के आँकड़े पेश किए.पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। वे एफ़आईआर भी दर्ज नहीं कर रहे हैं। 'लव जिहाद' और अन्य सभी प्रकार के साइबर अपराध हो रहे हैं। लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कहती हैं 'बांग्ला निजेर मेयेकेई चाय', लेकिन क्या वह इकलौती बेटी हैं?... हमने आरजी कर, दुर्गापुर, पार्क स्ट्रीट बलात्कार कांड देखा... कोई सुरक्षा नहीं है। एक महिला होने के बावजूद, मुख्यमंत्री बलात्कार पीड़िता के चरित्र पर सवाल उठा रही हैं, कह रही हैं कि उसे रात में बाहर नहीं निकलना चाहिए था, यह एक छोटी और अलग-थलग घटना थी। यह शर्मनाक है। ये सब तभी खत्म होगा जब 2026 में मोदी सरकार आएगी। वो सभी महिलाओं को आगे ले जाना चाहते हैं. जन औषधि स्टोर पर 1 रुपए प्रति नैपकिन सेनेटरी नैपकिन मिलेगा

कई परिवार अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण बच्चों को स्कूल से निकालकर काम पर लगा देते हैं, ताकि वे परिवार की आय में योगदान कर सकें। लड़कियों के मामले में, जल्दी शादी (Early Marriage) एक महत्वपूर्ण कारण है, जैसा कि कुछ अध्ययनों में 55% तक लड़कियों ने बताया है कि उनके परिवारों ने उन्हें स्कूल भेजने के बजाय शादी करना चाहा।प्राथमिक स्तर पर मुफ्त भोजन जैसी योजनाओं के बंद होने या कम होने से भी छात्रों को माध्यमिक स्तर पर जाने के लिए प्रोत्साहन कम हो सकता है, जिससे वे पढ़ाई छोड़ देते हैं।

कई स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात (Pupil-Teacher Ratio - PTR) असंतुलित है, जिससे शिक्षकों का वितरण तर्कहीन हो जाता है। इसके अलावा, राज्य के कई सरकारी स्कूल जर्जर हालत में हैं या उनमें नामांकन शून्य है, जिससे शिक्षा के बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति उजागर होती है। कुछ छात्र पढ़ाई में कठिनाई या पाठ्यक्रम के साथ तालमेल बिठाने में असमर्थता के कारण स्कूल छोड़ देते हैं। शिक्षकों की अनुपस्थिति या उनकी योग्यता में कमी भी छात्रों को प्रेरित करने में विफल रहती है।कुछ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति माता-पिता की जागरूकता और रुचि कम है, या वे बच्चों के घरेलू कामों में मदद करने को पढ़ाई से अधिक प्राथमिकता देते हैं।

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