बिहार में वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. जहां एक ओर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया ‘स्पेशल समरी रिवीजन (SIR)’ का बचाव किया. वहीं दूसरी ओर मुकेश साहनी ने इसे ‘फर्जीवाड़ा‘ बताते हुए लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया है. दोनों ने इसको लेकर बयान दिए हैं.
विपक्ष SIR को खत्म कराना चाहते हैं
जीतन राम मांझी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “मैं तो यही समझता हूं कि ये लोग SIR को खत्म कराना चाहते हैं. उन्होंने चुनाव आयोग के काम की सराहना करते हुए कहा कि आयोग ने ड्राफ्ट तैयार कर दिया है और लोगों के पास अभी भी एक महीने का समय है कि वे लिस्ट में अपना नाम देख लें. अगर नाम नहीं है, तो उसे जुड़वा सकते हैं. उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड और कर्नाटक में भी SIR होने जा रहा है, लेकिन वे इसकी चर्चा नहीं करेंगे. मांझी ने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वे सिर्फ ‘SIR हटाओ‘ की रट लगाए हुए हैं.
दूसरी तरफ, वीआईपी प्रमुख मुकेश साहनी ने इसे शुरू से ही ‘फर्जीवाड़ा‘ बताया। उन्होंने अपनी पत्नी का उदाहरण देते हुए कहा, “मेरी पत्नी मुंबई में रहती है, फिर भी उसका नाम बिहार की वोटर लिस्ट में है. उन्होंने इसे कई तरह के फर्जीवाड़े का एक हिस्सा बताया और कहा कि ऐसे में लोकतंत्र खतरे में है. साहनी ने दावा किया कि अगर 65 लाख लोगों के नाम काटे गए हैं, तो बिहार के 40 सांसदों की सदस्यता खत्म होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि महागठबंधन की सरकार मजबूती से बनने जा रही है और बिहार की जनता बीजेपी को नाव पर बैठने नहीं देगी.
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग और एसआईआर पर दिए गए बयान को लेकर पलटवार किया। उन्होंने सवाल किया कि कर्नाटक में क्या हुआ? हिमाचल प्रदेश में क्या हुआ? जहां वह चुनाव जीत जाते हैं, वहां सबकुछ ठीक है और जहां हम लोग जीतते हैं, वहां चोरी होती है।