जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म यहीं हुआ था। माना जाता है कि भगवान बुद्ध ने अपना अंतिम भोजन यहीं कुंडा नाम के लोहार के घर पर किया था। इसीलिए बिहार का वैशाली, जैन और बौद्ध दोनों परंपराओं में खास आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है।