बिहार की राजनीति में इन दिनों नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। दो दिन पहले तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर एक विशेष शौचालय की तस्वीर साझा करते हुए उसे मुख्यमंत्री Nitish Kumar की समृद्धि यात्रा से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने दावा किया कि सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है और आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर दिखावे पर खर्च किया जा रहा है। तेजस्वी ने उस शौचालय पर हुए कथित भारी खर्च को लेकर सवाल उठाते हुए सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर भी टिप्पणी की थी। इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष आमने-सामने आ गए।
तेजस्वी यादव ने हाल के दिनों में बिहार सरकार की आर्थिक स्थिति को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान के लिए राज्य सरकार को आकस्मिक निधि (कंटिजेंसी फंड) से हजारों करोड़ रुपये निकालने पड़े, जो वित्तीय संकट का संकेत है। उनके अनुसार यदि नियमित योजनाओं के लिए भी आकस्मिक निधि का उपयोग करना पड़ रहा है, तो यह राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
इन आरोपों के जवाब में जदयू नेता Neeraj Kumar ने तेजस्वी यादव पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि बिहार की वित्तीय स्थिति पूरी तरह मजबूत और नियंत्रित है तथा विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। नीरज कुमार ने कहा कि फर्जीवाड़ा और वित्तीय अनियमितताओं का इतिहास राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और उसके नेताओं का रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव के परिवार के शासनकाल में कई बार बजट से अधिक व्यय किया गया था। नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगों, विधवाओं और महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने आकस्मिक निधि से राशि निकाली थी और इसके लिए विधायिका से आवश्यक स्वीकृति भी प्राप्त की गई है। उन्होंने कहा कि यह एक वैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया है तथा आने वाले समय में इसे विधिवत विनियमित भी किया जाएगा।
जदयू नेता ने आगे कहा कि जो लोग सरकारी खजाने को लूटकर संपत्ति बनाने के आरोपों से घिरे रहे हैं, उन्हें दूसरों के चरित्र और कार्यशैली पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। इस बयान के साथ बिहार की राजनीति में एक बार फिर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। आगामी चुनावों को देखते हुए ऐसे मुद्दों पर राजनीतिक संघर्ष और अधिक तेज होने की संभावना है।