हाल ही में, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का छठ पूजा और यमुना नदी से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें बस लोगों के वोट चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने यमुना नदी के पास पाइप से पानी ले जाकर एक तालाब बनाने का नाटक किया और अगर लोग उनसे वोट के लिए स्टेज पर चढ़कर नाचने को कहेंगे तो वे वह भी कर लेंगे। इस बयान पर उनके विरोधियों, विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के बयान को 'छठी मैया का अपमान' बताया और कहा कि राहुल गांधी ने सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी का नहीं, बल्कि छठ पर्व में विश्वास रखने वाले सभी भक्तों का अपमान किया है, जो इस पर्व को मन से प्रार्थना करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने ऐसा पहली बार नहीं किया है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ यह कहकर "भाषा की मर्यादा" का उल्लंघन किया है कि मोदी वोट के लिए "नाच भी लेंगे"। इसके अलावा, एक अन्य संदर्भ में, जब राहुल गांधी ने छठ पूजा पर बधाई दी थी, तब बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने उन पर 'कॉपी-पेस्ट' का आरोप लगाया था और कहा था कि उन्होंने पिछले साल की वही तस्वीर इस बार भी इस्तेमाल की है, जो उनकी राजनीतिक मजबूरी को दर्शाती है और यह 'बिहार का अपमान' है। कुल मिलाकर, विरोधियों ने राहुल गांधी के इस बयान को "घोर निंदनीय", "अपमानजनक" और "वोट की राजनीति से प्रेरित" करार दिया।
JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर कहा, जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के लिए किया है, उससे ज्यादा शर्मनाक कुछ और नहीं हो सकता है।दरभंगा में भी इन्हीं की पार्टी के लोगों ने प्रधानमंत्री की माताजी के बारे में अपशब्द कहे थे। जैसी बातें नेता करेगा वैसी ही कार्यकर्ता कहेगा