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Bengal Election 2026: बंगाल में चुनाव प्रचार अभियान हुआ तेज, चिराग- तेजस्वी आए आमने- सामने!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Sat, 25 Apr 2026 01:25 AM IST

5 राज्यों में जारी विधानसभा चुनाव के बीच अब सियासी पारा हाई होने लगा है। खासकर बंगाल में पहले चरण का मतदान होने के बाद अब नेताओं की ओर से खुलकर एक- दूसरे पर हमले किए जा रहे हैं। इन सब के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, "मैं मानता हूं कि पांचों राज्यों में NDA सरकार बनने जा रही है, बंगाल में जिस तरीके से हिंसा और अपराध के बल पर ममता बनर्जी ने शासन करके राज्य को बर्बाद करने का काम किया है ऐसे में बंगाल की जनता भी डबल इंजन की सोच वाली सरकार बनाकर बंगाल को पूर्ण विकास की राह पर आगे लेकर जा रही है।"
 

 बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा, "हम यहां TMC के लिए प्रचार करने आए हैं और हमें पूरा विश्वास है कि ममता बनर्जी फिर चुनाव जीतेंगी और मुख्यमंत्री बनेंगी। ममता बनर्जी ने बिहारियों के लिए बंगाल में काफी काम किया है.बंगाल में भाजपा का कुछ चलने वाला नहीं है


पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है और विभिन्न दलों के नेता जोर-शोर से प्रचार में जुट गए हैं। इसी क्रम में बिहार की राजनीति के दो प्रमुख चेहरे चिराग पासवान और तेजस्वी यादव भी आमने-सामने नजर आए, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। चिराग पासवान, जो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख हैं, ने भाजपा के समर्थन में कई रैलियां कीं और ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और कथित तुष्टिकरण की राजनीति को मुद्दा बनाते हुए परिवर्तन की जरूरत पर जोर दिया। वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने तृणमूल कांग्रेस के समर्थन में चुनावी सभाएं कीं और भाजपा पर देश में विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया। तेजस्वी यादव ने अपने भाषणों में बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को उठाते हुए जनता से भाजपा को सत्ता से बाहर रखने की अपील की। 

दोनों नेताओं के बयानों में तीखापन साफ नजर आया, जिससे यह मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। बंगाल की राजनीति में बाहरी नेताओं की एंट्री हमेशा चर्चा का विषय रहती है और इस बार भी बिहार के इन युवा नेताओं की सक्रियता ने चुनावी समीकरणों को नई दिशा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही ये नेता सीधे तौर पर बंगाल की राजनीति से जुड़े न हों, लेकिन इनके प्रचार से संबंधित दलों के समर्थकों को ऊर्जा मिलती है और चुनावी माहौल प्रभावित होता है। इस बीच, राज्य में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है और चुनाव आयोग की निगरानी में प्रचार अभियान चल रहा है। कुल मिलाकर, बंगाल का चुनाव अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राष्ट्रीय स्तर के नेता भी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जिससे मुकाबला और रोमांचक बनता जा रहा है।
 

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