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Attack on Kunal Ghosh: TMC विधायक कुणाल घोष पर अंडे फेंके गए, भड़के सांसद कल्याण बनर्जी!

Tue, 16 Jun 2026 01:19 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद का दौर काफी उथल-पुथल भरा रहा। चुनावी नतीजों के बाद जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, वहीं पार्टी के कई नेताओं के प्रति जनता के एक वर्ग में असंतोष भी देखने को मिला। इसी क्रम में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा को और तेज कर दिया। कोलकाता में टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद पार्टी नेता कुणाल घोष जब उनके आवास से बाहर निकल रहे थे, तभी एक स्थानीय युवक ने उन पर अंडा फेंक दिया। हालांकि इस घटना में कुणाल घोष को कोई गंभीर चोट नहीं पहुंची, लेकिन इसने जनता के एक वर्ग में मौजूद नाराजगी को उजागर कर दिया। घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित किया तथा संबंधित युवक को हिरासत में ले लिया। बाद में युवक, जिसकी पहचान चंदन के रूप में बताई गई, ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह कुछ नेताओं के व्यवहार और कार्यशैली से बेहद नाराज है। उसके अनुसार, कई नेताओं ने जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया और लोगों के साथ अन्याय किया है। चंदन ने आरोप लगाया कि कुणाल घोष भी ऐसे नेताओं में शामिल हैं और इसी कारण उसने विरोध जताने के लिए यह कदम उठाया।

यह घटना ऐसे समय में हुई जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी संवेदनशील बना हुआ था। चुनावों के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी था और जनता के बीच भी राजनीतिक मुद्दों को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल किसी एक व्यक्ति के खिलाफ विरोध नहीं दर्शातीं, बल्कि वे उस व्यापक असंतोष का संकेत भी हो सकती हैं जो जनता के कुछ वर्गों में राजनीतिक नेतृत्व को लेकर मौजूद रहता है। हालांकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसक या अपमानजनक कार्रवाई को उचित नहीं माना जाता। राजनीतिक मतभेदों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से व्यक्त करना ही लोकतंत्र की मूल भावना है। इस घटना के बाद टीएमसी नेताओं ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताया, जबकि विपक्षी दलों ने इसे जनता की नाराजगी का परिणाम बताया। कुल मिलाकर, कुणाल घोष पर अंडा फेंके जाने की यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ते राजनीतिक तनाव और जनता की भावनाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गई, जिसने राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर फिर से ध्यान आकर्षित किया।

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