प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और भाजपा नेता सुमित्रा महाजन ने कहा, "आज मुझे अचानक दोपहर को खबर मिली कि आशा गुजर चुकी हैं.इस उम्र में भी वे अलग ही उत्साह से रहती थीं और उत्साह से गाती भी थीं। उनके गीतों की शैली भी ऐसी थी कि जैसे हवा का मस्त झोंका हो। उनके गीतों के शब्द जीवित हो उठते थे.उनके गीत जीवंत थे
उनका करियर कई दशकों तक फैला हुआ है, जिसमें उन्होंने हजारों गीत गाए और हर शैली में अपनी अलग पहचान बनाई। चाहे वह रोमांटिक गीत हों, ग़ज़ल, पॉप, शास्त्रीय संगीत या फिर चुलबुले और तेज़ रफ्तार वाले गाने हर रूप में उनकी आवाज़ ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है। सुमित्रा महाजन के अनुसार, इस उम्र में भी उनका उत्साह और ऊर्जा अद्भुत है, जो उन्हें अन्य कलाकारों से अलग बनाती है।
उनकी गायकी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि वे हर गीत में जान डाल देती हैं। ऐसा लगता है मानो गीत के शब्द सचमुच जीवित हो उठे हों। उनकी आवाज़ में एक विशेष प्रकार की लचक, मिठास और चंचलता है, जिसे महाजन ने “हवा के मस्त झोंके” जैसा बताया। यह तुलना उनके संगीत की ताजगी और स्वाभाविकता को बहुत सटीक रूप में दर्शाती है। जब भी आशा भोसले कोई गीत गाती हैं, तो वह केवल एक प्रस्तुति नहीं होती, बल्कि एक अनुभव बन जाता है, जिसमें भावनाएं, ऊर्जा और अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम होता है।
भारतीय सिनेमा और संगीत जगत में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कई पीढ़ियों के संगीत प्रेमियों को प्रभावित किया है और आज भी उनके गीत उतने ही लोकप्रिय हैं जितने पहले हुआ करते थे। उनके गाए गीतों में जो जीवंतता और विविधता है, वही उन्हें एक महान कलाकार बनाती है। इस प्रकार, सुमित्रा महाजन के शब्द आशा भोसले की कला, उनके उत्साह और उनके अमर संगीत को सम्मान देने का एक भावनात्मक प्रयास प्रतीत होते हैं।