क्या बिहार में शराबबंदी खत्म होने वाली है? क्या सत्ता बदलते ही नीति भी बदल जाएगी? और क्या नई सरकार ‘सुशासन मॉडल’ को जारी रखेगी या उसमें बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा?
मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के हटते ही अब शराबबंदी पर सियासी बहस तेज हो गई है। जदयू विधायक अनंत सिंह खुलकर कह रहे हैं “दारू चालू होना चाहिए”… और दावा करते नजर आए कि वे इस मुद्दे पर नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बात करेंगे।
लेकिन सवाल ये है क्या वाकई बिहार में शराबबंदी हटाने की पहल होगी? क्या नई सरकार इस पर बड़ा फैसला ले सकती है? या फिर यह सिर्फ एक नेता का निजी बयान है?
क्या नीतीश कुमार का प्रभाव अभी भी सरकार पर बना रहेगा? और क्या विपक्ष इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक हथियार बनाएगा?
बिहार की सियासत में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अब नई बहस ने जोर पकड़ लिया है क्या राज्य में शराबबंदी खत्म हो सकती है? मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के हटते ही इस मुद्दे ने अचानक राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। जदयू विधायक अनंत सिंह के बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है।
मोकामा से विधायक अनंत सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि बिहार में शराबबंदी पर फिर से विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा “दारू चालू होना चाहिए… नशा-पानी बहुत खराब हो गया है।” उनका दावा है कि शराबबंदी के बावजूद राज्य में अवैध नशे का कारोबार बढ़ा है, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे पर जल्द ही नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे सम्राट चौधरी से बात करेंगे।
दरअसल, बिहार में शराबबंदी नीतीश कुमार की सबसे बड़ी और चर्चित नीतियों में से एक रही है। इसे ‘सुशासन मॉडल’ का अहम हिस्सा माना जाता है। लेकिन अब जब सत्ता की बागडोर सम्राट चौधरी के हाथ में जा रही है, तो यह सवाल उठने लगा है कि क्या नई सरकार इस नीति को जारी रखेगी या इसमें बदलाव करेगी?
हालांकि, अनंत सिंह ने यह भी संकेत दिया कि नई सरकार में भी नीतीश कुमार का प्रभाव बना रहेगा। उन्होंने कहा “मालिक वही रहेंगे… उन्हीं के इशारे पर काम होगा।” यानी साफ है कि भले ही चेहरा बदल गया हो, लेकिन नीति और दिशा में निरंतरता की उम्मीद जताई जा रही है।
इसी बीच, राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी पर तंज कसते हुए उन्हें “लालू की पाठशाला” से निकला बताया। इस पर पलटवार करते हुए अनंत सिंह ने कहा कि तेजस्वी के पास अब कोई काम नहीं बचा है और वे सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं।
वहीं जदयू की ओर से भी नई सरकार को लेकर स्पष्ट संदेश दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि सम्राट चौधरी “विकसित बिहार” के संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगे और नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल को ही आगे ले जाएंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नीतीश कुमार जैसे नेता की कमी महसूस होगी, लेकिन उनकी नीतियां ही सरकार का आधार बनी रहेंगी।
इधर, एक और दिलचस्प पहलू यह है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर भी चर्चा जारी है। जदयू का कहना है कि वे संगठन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे, जिससे पार्टी को मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, बिहार में सत्ता परिवर्तन के साथ अब नीतियों को लेकर भी नई बहस छिड़ गई है। शराबबंदी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का रुख क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। क्या सम्राट चौधरी इस कानून को जारी रखेंगे या बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाएंगे? और क्या नीतीश कुमार का प्रभाव वाकई पहले जैसा बना रहेगा?
इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति की दिशा तय करेंगे।