भारत-म्यांमार सीमा से अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट… नवरात्र की रात और दुर्गा का सजीव रूप। रिपोर्टर एन. अर्जुन जब पहली बार जौखतार और जौते चौकियों पर असम राइफल्स की राइफल वूमन के साथ LIVE ऑपरेशन में शामिल हुए, तो हर पल वीरता और पराक्रम की गूंज महसूस की। ये वही बेटियां हैं, जो अंधेरे जंगलों और खड़ी पहाड़ियों में दुश्मनों पर बिजली की तरह टूट पड़ती हैं।
भारत-म्यांमार सीमा मणिपुर, मिज़ोरम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश से जुड़ी है। यह इलाका ड्रग्स तस्करी का सबसे बड़ा मार्ग है। म्यांमार से मेथाम्फेटामाइन (याबा टैबलेट, क्रिस्टल), हेरोइन और गांजा की खेप करोड़ों में भारत पहुंचती है। लेकिन मातृशक्ति की ये वीरांगनाएं तस्करों के हर दांव को नाकाम कर रही हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट में साफ दिखा रात का अंधेरा, हथियारबंद तस्करों की हलचल और पहाड़ी रास्तों से घुसपैठ की कोशिशें। तभी जंगल की खामोशी तोड़ती हैं असम राइफल्स की वूमन कमांडो। पलक झपकते ही दुश्मनों पर टूट पड़ना, ठीक वैसे ही जैसे काली या दुर्गा संहार करती हैं।
असम राइफल्स, भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल, गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है। इसका नारा है “Sentinels of the North East”। यही जज़्बा इन बेटियों में नजर आता है। हर धर्म, हर जाति, हर वर्ग की बेटियां एकजुट होकर मातृभूमि की रक्षा कर रही हैं।
नवरात्र की इस घड़ी में जब देशभर में शक्ति की पूजा हो रही है, भारत-म्यांमार सीमा पर उसकी असली परिभाषा दिखाई देती है। यहां शक्ति सिर्फ आराधना नहीं, बल्कि जिंदा हकीकत है।