बालोद जिले का यह मंदिर पहले एक पेड़ से जुड़ा हुआ था। माता का प्रमाण आज भी उस पेड़ पर है और उसके सामने शीश झुकाकर ही कोई आगे बढ़ता है। यहां पर जो कोई भी मनोकामना मांगते हैं, वो पूरी जरूर होती है।
22 September 2026
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