जिला ऊना की उपतहसील जोल के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में किसानों ने गेहूं की फसल को पानी देना शुरू कर दिया है। क्षेत्र में सुबह-शाम हल्की ठंड महसूस की जा रही है, लेकिन दिन में कड़ाके की धूप पड़ने से खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है। ऐसे में किसानों का कहना है कि फसल को समय पर सिंचाई देना बेहद जरूरी हो गया है। स्थानीय किसान अर्जुन सिंह ने बताया कि इस समय गेहूं की फसल में बालियां निकलने की प्रक्रिया चल रही है, जो पैदावार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण चरण होता है। दिन में तेज धूप के कारण मिट्टी सूख रही है। यदि समय पर पानी न दिया जाए तो दाने का भराव प्रभावित हो सकता है। इसलिए हमने सिंचाई शुरू कर दी है उन्होंने कहा। किसानों का मानना है कि बालियां निकलने के समय गेहूं को पर्याप्त मात्रा में खाद और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। संतुलित उर्वरक और सही समय पर पानी देने से फसल मजबूत होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। किसान रमेश कुमार ने कहा हम सिंचाई के साथ-साथ यूरिया और अन्य जरूरी खाद का भी प्रयोग कर रहे हैं। यदि इस समय देखभाल ठीक से की जाए तो फसल अच्छी और स्वस्थ होगी जिससे पैदावार भी अधिक मिलेगी। वहीं किसान बलदेव ठाकुर का कहना है कि बदलते मौसम के कारण खेती में सतर्कता बढ़ानी पड़ी है। पहले मौसम थोड़ा स्थिर रहता था लेकिन अब धूप और ठंड का असर एक साथ देखने को मिल रहा है। ऐसे में खेतों की नियमित निगरानी जरूरी हो गई है उन्होंने बताया। किसानों को उम्मीद है कि यदि मौसम अनुकूल रहा और सिंचाई व पोषण प्रबंधन सही ढंग से होता रहा तो इस वर्ष गेहूं की फसल बेहतर उत्पादन देगी। कृषि जानकारों का भी कहना है कि बालियां निकलने के समय फसल को पानी और पोषक तत्वों की कमी नहीं होने देनी चाहिए, ताकि दाने का विकास सुचारु रूप से हो सके।