इन दिनों फलों का राजा कहे जाने वाले आम का सीजन इस समय पूरे चरम पर है। चाहे इस बार आमो की गत वर्ष से कुछ कम हुई है लेकिन फिर भी आमों की फसल को लेकर ग्रामीण लोग इन्हें बेचकर खासी कमाई कर रहे है। बता दें मीठे, खट्टे मीठे ,रसीले जायकेदार आम की बिक्री जोर शोर से जहां दुकान से सड़क के किनारे तक हो रही है । एक ऐसा भी समय रहा है जब आमों के पेड़ आम के मौसम में आम के ठेकेदार खरीद लेते थे तथा आमों की तुड़ाई करके पंजाब व अन्य मंडियों में बिक्री के लिए ले जाते थे, लेकिन विगत कुछ वर्षों से हिमाचल की सड़कों के किनारे ही स्थानीय ग्रामीण लोग इसे बेचकर अपनी रोजी रोटी का जुगाड़ करते दिख रहे हैं। अपने चटपटे स्वाद के चलते आम कहा जाने वाला फ़लों का राजा आम आम के सीजन के चलते इन दिनों वी आई पी फल बना हुआ आम नाम होने के बावजूद खासेआम बना हुआ है। गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे किसान उनके बुजुर्गो द्वारा वर्षों पूर्व लगाये गए आमों को बेचकर इस सीजन में अपने परिवार का पोषण कर रहे हैं। हिमाचली आम सड़कों के किनारे बिकने के कारण दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, जम्मू के पर्यटकों, जो हिमाचल घूमने पहुंच रहे हैं, सभी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। इस कार्य से जुड़े सुरेश, शिव, कुलदीप, रिम्पी आदि लोगों ने बताया कि लोकल आम काफी पसंद किया जा रहा है। वहीं इन लोगों ने सरकार से आम की फसल के व्यापार को प्रोत्साहित करने हेतु किसानों को हरसम्भव सुविधाएं सेब की फसल की तर्ज पर दिए जाने की मांग उठाई। वहीं, क्षेत्र के मुबारिकपुर से देहरा कांगड़ा मुख्य सड़क के किन्नू, थनीकपुरा, बगली, चलाली, ढलियारा, में आम की उपलब्धता का आम के शौकीन खूब मजा ले रहे हैं। बता दें कि ताजे जायकेदार आम की छोटी टोकरी 50 से सौ रुपये के हिसाब से, 40 से 60 रुपये प्रति किलो या ग्राहक के साथ कीमत तय होने पर धड़ल्ले से बिक रहे हैं। बता दें कि अन्य राज्यों दिल्ली, पंजाब , हरियाणा आदि से कुछ लोगों नरेश, रिंकू, जग्गी, आशू, संदीप ने कहा कि हिमाचली आम का स्वाद अतुलनीय है। इसीलिए तो हर कोई इन दिनों इनका स्वाद चखने का मौका ढूंढ रहा है। बुजुर्ग कृष्ण कुमार की मानें तो बाजार में बिकने वाले दशहरी, सफेदा, तोता आमों से स्थानीय देसी किस्म के आम जहां स्वास्थ्य के लिए उत्तम हैं वहीं, आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।