हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ के अध्यक्ष एवं बस एंड कार ऑपरेटर कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष राजेश पराशर ने प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश सरकार से टोल नीति में हाल ही में की गई एंट्री टैक्स वृद्धि पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जो निजी बसें प्रदेश के निर्धारित कॉरिडोर एवं रूटों पर संचालित हो रही हैं — जैसे ऊना से संतोषगढ़ वाया अजौली मोड़, ऊना से नैना देवी वाया नंगल, दौलतपुर से टेरेस वाया तलवाड़ा, जसूर से ढांगू वाया पठानकोट तथा नालागढ़ से परवाणू वाया कालका- इन रूटों पर एंट्री टैक्स अथवा टोल टैक्स वसूल करना पूर्णतः अनुचित एवं अनैतिक है। पराशर ने स्पष्ट किया कि ये सभी बसें हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत हैं तथा राज्य सरकार को स्पेशल रोड टैक्स, टोकन टैक्स, डीज़ल पर वैट एवं कल-पुर्जों पर वैट के रूप में नियमित राजस्व प्रदान करती हैं। ऐसी स्थिति में कॉरिडोर परमिट पर संचालित बसों से अतिरिक्त एंट्री टैक्स या टोल टैक्स लेना परिवहन व्यवसाय पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना है। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि टोल नीति में संशोधन कर इन कॉरिडोर रूटों पर संचालित हिमाचल पंजीकृत बसों को तत्काल प्रभाव से राहत प्रदान की जाए। प्रेस वार्ता में पराशर ने जिला कांगड़ा के रानीताल में स्थापित ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर के संबंध में भी गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत 8–10 आरएलए में वाहनों की पासिंग बंद कर सीधे इस केंद्र में पासिंग करवाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पासिंग शुल्क में लगभग ₹1000 की वृद्धि हो चुकी है। वाहन स्वामियों को 125–150 किलोमीटर तक खाली वाहन ले जाकर पासिंग करवानी पड़ती है। केंद्र पर किसी प्रकार की वर्कशॉप सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे छोटी कमियों को दूर करना भी कठिन हो जाता है। इस प्रक्रिया से पासिंग खर्च 3–4 गुना तक बढ़ रहा है और समय की भी अत्यधिक हानि हो रही है। बसें जब पासिंग हेतु अपने निर्धारित रूट परमिट से बाहर जाती हैं, तो दुर्घटना की स्थिति में बीमा दावों पर भी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जो ऑपरेटरों के लिए गंभीर जोखिम है। हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ की ओर से राजेश पराशर ने प्रदेश सरकार से विनम्र अपील की है कि जब तक पूरे प्रदेश में ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटरों का पर्याप्त विस्तार नहीं हो जाता, तब तक पासिंग की व्यवस्था वैकल्पिक (ऑप्शनल) रखी जाए। जिन वाहन स्वामियों के लिए ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर निकट हैं, वे वहां सुविधा अनुसार पासिंग करवा सकें। दूरस्थ क्षेत्रों के ऑपरेटरों को पूर्ववत आरएलए/आरटीओ कार्यालयों के माध्यम से पासिंग की अनुमति दी जाए। अंत में पराशर ने कहा कि निजी बस ऑपरेटर प्रदेश की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ हैं और सरकार व परिवहन विभाग से सहयोगात्मक एवं व्यावहारिक नीति की अपेक्षा रखते हैं, ताकि जनता को सुरक्षित, सुलभ और निर्बाध परिवहन सेवाएं मिलती रहें।