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ऊना: बिखरे सपनों को पक्की छत दे रही मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना

ऊना जिले के नंगल खुर्द निवासी रंजीत सिंह और उनके भाई-बहनों के लिए भी अपने पक्के घर का सपना माता-पिता के असमय निधन के बाद एक अधूरी कल्पना बनकर रह गया था। लेकिन हिमाचल सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना से मिली सहायता के बूते उनका यह सपना अब साकार हो रहा है। योजना के तहत रंजीत को लगभग पांच मरले भूमि और गृह निर्माण के लिए एक लाख रुपये की पहली किश्त प्राप्त हुई है। अब उस जमीन पर दो कमरों, लॉबी और शौचालय सहित एक पक्के घर की नींव रखी जा चुकी है। मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत पात्र निराश्रित जनों को गृह निर्माण के लिए कुल तीन लाख रुपये की सहायता चार किश्तों में प्रदान की जाती है। साथ ही घर के लिए जमीन न होने की स्थिति में तीन बिस्वा तक भूमि भी राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। रंजीत ने बताया कि माता-पिता के असमय निधन के बाद उनके बड़े भाई ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली। 6 भाई-बहनों के इस परिवार के पास रहने को सिर्फ एक कमरा था और खाना, सोना, पढ़ना, सब कुछ उसी एक जगह पर होता था। आर्थिक तंगी इतनी गहरी थी कि उन्होंने बड़े भाई के साथ दिहाड़ी मजदूरी शुरू कर दी, ताकि दो वक्त की रोटी जुटाई जा सके। रंजीत की बहन इस योजना के सहयोग से सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण ले रही है और योजना में तीन भाई-बहनों को प्रतिमाह चार-चार हजार रुपये की सामाजिक सुरक्षा सहायता भी मिल रही है। ऊना के जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) नरेंद्र कुमार बताते हैं कि जिले में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत अब तक 18 बच्चों को गृह निर्माण के लिए पहली किश्त के रूप में एक-एक लाख रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी कमलदीप बताते हैं कि सरकार ने अब योजना का दायरा और व्यापक किया गया है। उपायुक्त ऊना जतिन लाल का कहना है कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की संवेदनशील सोच एवं कल्याणकारी दृष्टिकोण के अनुरूप जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना का लाभ प्रत्येक पात्र बच्चे तक समय पर और प्रभावी ढंग से पहुंचे।

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