भारतीय मजदूर संघ की जिला ऊना इकाई ने विभिन्न श्रमिक मांगों को लेकर सोमवार को रोष रैली निकाली। संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एमसी पार्क से उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकालकर श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दे उठाए। इसके बाद जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री को 11 सूत्रीय मांगपत्र भेजा गया। संघ नेता हरिकृष्ण ने कहा कि सरकार को श्रमिकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने और न्यूनतम वेतनमान बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और मिड-डे मील कर्मचारियों समेत विभिन्न श्रेणियों में कार्यरत कर्मचारियों को नियमित किया जाना चाहिए। ठेका और संविदा कर्मचारियों के लिए समान काम के लिए समान वेतन की व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई। भारतीय मजदूर संघ ने चारों श्रम संहिताओं में श्रमिक विरोधी बताए जा रहे प्रावधानों को वापस लेने की मांग भी उठाई। संघ के अनुसार श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को मजबूत किया जाना चाहिए। रैली के दौरान बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी मांगें भी प्रशासन के समक्ष रखी गईं। संघ ने बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग की। इसके अलावा विभिन्न बैंकों में पार्ट टाइम वर्कर और दैनिक भोगी के तौर पर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को संबंधित बैंक के अधीन करने की मांग भी उठाई गई। संघ नेताओं ने कहा कि श्रमिक वर्ग लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करता रहा है। सरकार को मांगों पर सकारात्मक पहल करते हुए समाधान की दिशा में कदम उठाने चाहिए। हरिकृष्ण ने कहा कि यदि सरकार ने भारतीय मजदूर संघ की मांगों को अनसुना किया तो मजदूरों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि मार्च 2027 में शिमला में आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांगपत्र में उठाए गए मुद्दों पर समय रहते कार्रवाई करने की मांग की।