खेतों में अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से बंजर होती जमीन और बढ़ती बीमारियों को देखते हुए कृषि विभाग ने सिरमौर में विशेष खेती बचाओ अभियान शुरू किया है। एक जून से चल रहे इस अभियान के तहत किसानों को रसायनों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक 26 जागरूकता शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों के माध्यम से करीब 3200 किसानों को रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी, जल प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई है। साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विभाग ने ऐसे 50 शिविर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अभियान में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) धौलाकुआं के विशेषज्ञ डॉ. पंकज मित्तल और उनकी टीम तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है। वहीं, आत्मा परियोजना के निदेशक डॉ. नदीम कौंडल की देखरेख में कृषि विभाग इस अभियान को धरातल पर उतार रहा है। प्रशिक्षण शिविरों में विशेषज्ञ किसानों को बता रहे हैं कि खेतों में डाले जाने वाले रसायन बारिश और सिंचाई के पानी के साथ प्राकृतिक जल स्रोतों में मिलकर उन्हें प्रदूषित कर रहे हैं। इस दूषित पानी के सेवन से कैंसर, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इसके अलावा मिट्टी की जैविक गुणवत्ता भी लगातार प्रभावित हो रही है। कृषि विभाग सिरमौर के छह ब्लॉकों में अभियान चला रहा है। ग्रामीणों को मिट्टी परीक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। विभाग ने अभियान के दौरान 2000 मिट्टी के नमूनों की जांच का लक्ष्य रखा है। इनमें से अब तक 600 नमूनों की जांच पूरी कर किसानों को उनकी रिपोर्ट भी सौंपी जा चुकी है। विभाग ने अन्य किसानों से भी अपनी भूमि की मिट्टी की जांच करवाने की अपील की है। कृषि विभाग जिला सिरमौर के उपनिदेशक डॉ. साहब सिंह ने बताया कि एक जून से जिले के सभी छह ब्लॉकों में खेती बचाओ अभियान पूरी सक्रियता से चल रहा है। किसानों को रसायनों का प्रयोग कम करने, प्राकृतिक खेती अपनाने और मिट्टी की जांच करवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि जमीन और मानव स्वास्थ्य दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।