युवा दिवस के मौके पर स्टेपको ने नाहन में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की अमर और कालजयी कहानी कफन का अत्यंत प्रभावशाली नाट्य मंचन किया। न्यू हॉल में आयोजित इस नाटक ने समाज के उस कठोर, संवेदनहीन और नग्न यथार्थ को दर्शकों के सामने लाकर खड़ा कर दिया, जिसे देखकर सभागार में मौजूद हर आंख नम हो गई। प्रेमचंद की चर्चित कहानी कफन समाज के सबसे निचले और वंचित वर्ग की उस दारुण स्थिति को बयां करती है, जहां अत्यधिक गरीबी और भूख के आगे मानवीय संवेदनाएं, रिश्ते और भावनाएं पूरी तरह दम तोड़ देती हैं। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने सामाजिक व्यवस्था की विडंबनाओं, स्वार्थ और मानवीय लाचारी के बीच के संघर्ष को बेहद सधे हुए अंदाज में प्रस्तुत किया। स्टेपको संस्था के अध्यक्ष रजित सिंह कंवर ने बताया कि मंचन का मुख्य उद्देश्य दर्शकों को मनोरंजन के साथ समाज के इस कड़वे सच से रूबरू कराना और उन्हें मानवीय संवेदनाओं पर फिर से विचार करने के लिए विवश करना था। इस गंभीर और संदेशपरक नाटक का कुशल निर्देशन रितेश मेहता एवं रजित सिंह कंवर की ओर से संयुक्त रूप से किया गया। इसके अतिरिक्त, फरजाना सैय्यद और गीता कैंथ द्वारा तैयार की गई यथार्थवादी वेशभूषा व सज्जा और अनीश सैनी व सोहेल की उत्कृष्ट मंच सज्जा ने दर्शकों को सीधे प्रेमचंद के कालखंड और उस अभावग्रस्त ग्रामीण परिवेश में पहुंचा दिया।