RSS नेता इंद्रेश कुमार ने कहा, "...कल 10 मार्च तिब्बती विद्रोह दिवस था। 1959 चीन ने तिब्बत में जो कत्लेआम किया... इसमें हजारों नहीं लाखों लाख तिब्बती शहीद हुए। उनको श्रद्धांजलि दी गई और ये संकल्प किया गया कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। एक दिन आएगा जब इतिहास बनेगा और तिब्बत को हम चीन के अत्याचारों से मुक्त होता देखेंगे। चीन को अपील की गई है कि उसे निर्वासित सरकार से वार्ता करनी चाहिए और दूसरा परम पावन दलाई लामा जी की नियुक्ति में दखल नहीं देना चाहिए, उसकी विधि कायम रहनी चाहिए। निर्वासित सरकार के साथ वार्ता करते हुए उसे सहजता के साथ व्यवहार करना चाहिए ताकि आने वाले कल में हिमालय रक्तरंजित ना हो। हिमालय पर्यावरण का, विकास का और खुशहाली का प्रतीक बनकर फले-फूले..."