बोलीवेरियन गणराज्य वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की ओर से किए जा रहे सैन्य आक्रमण और बमबारी की सीटू ने कड़े शब्दों में निंदा की है। सोमवार को सीटू कार्यकर्ताओं ने नीरथ, झाकड़ी, बिथल और रामपुर के चौधरी अड्डे में इस हमले के विरोध में धरने प्रदर्शन किए। विरोध प्रदर्शन के जरिये कार्यकर्ताओं ने इन आत्मघाती हमलों को रोकने और वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की गुहार की मांग की। कार्यकर्ताओं ने अमेरिकी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस निंदनीय घटना को वेनेजुएला के लोगों के संप्रभु अधिकारों का उल्लंघन बताया। सीटू क्षेत्रीय समन्वय समिति रामपुर की ओर से वेनेजुएला पर साम्राज्यवादी अमेरिका के हमले के खिलाफ नीरथ, झाकड़ी, रामपुर और बिथल में विरोध प्रदर्शन किए। इस प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू शिमला जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह, सीटू समन्वय समिति रामपुर के संयोजक दिनेश मेहता, नीलदत्त शर्मा, काम राज, मिलाप नेगी, राजपाल, अजय शर्मा, सुनील जिष्टू और देविंद्र ने संयुक्त राज्य अमेरिका सरकार की ओर से बोलीवेरियन गणराज्य वेनेजुएला के खिलाफ किए जा रहे सैन्य आक्रमण और बमबारी की सीटू कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि बीती 3 जनवरी को गणराज्य की राजधानी काराकास और मिरांडा, एरागुआ और ला गुआइरा राज्यों के नागरिक एवं सैन्य इलाकों के ऊपर विस्फोटों और विमान गतिविधियों की सबसे हालिया घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं। अमेरिकी आक्रमण की यह बढ़ती हुई तीव्रता अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मौजूदा संकट चरण और इससे उभरने की उसकी सैन्य योजना से उत्पन्न हो रही है। काराकास के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार, व्यापक गैस क्षेत्र, महत्वपूर्ण सोने के भंडार और कोल्टान और थोरियम जैसे दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के भंडार हैं, जो आधुनिक तकनीकों और रक्षा उद्योगों के लिए आवश्यक हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर वेनेजुएला के तेल की महत्ता और ऊर्जा अधिकारों पर पिछले विवादों का उल्लेख किया है, जिससे संकेत मिलता है कि इन रणनीतिक संसाधनों पर नियंत्रण नीति का एक केंद्रीय, हालांकि अक्सर अनकहा प्रेरक कारक है। सीटू नेताओं ने वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका के हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की किडनैपिंग की कड़ी निंदा की। सीटू ने अमेरिका के हमले के खिलाफ और लैटिन अमेरिका के लोगों के साथ एकजुटता में देश भर में विरोध की अपील की है। साथ ही राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की तत्काल रिहाई की मांग उठाई है। साथ ही भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह साम्राज्यवादी आक्रमण के खिलाफ सैद्धांतिक रुख अपनाएं और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में संप्रभुता, शांतिपूर्ण सह अस्तित्व और गुट निरपेक्षता के सिद्धांतों का समर्थन करे।