मंडी जिले के 14 स्कूल सीबीएसई बोर्ड के अधीन होने जा रहे हैं। अगले सत्र से इन स्कूलों का पढ़ने और पढ़ाने का तरीका बदलने वाला है। लेकिन उससे पहले क्या शिक्षा विभाग, शिक्षक और स्कूली बच्चे इस नई प्रणाली पर चलने के लिए तैयार हैं। सीबीएसई बोर्ड शिक्षा जगत का एक ऐसा नाम जहां से अधिकतर अभिभावकों का सपना होता कि उनका बच्चा दसवीं या बाहरवीं की परीक्षा को उतीर्ण करे। लेकिन अब यह सपना बेहद कम खर्चे पर पूरा होने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 100 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड के अधीन लाने का निर्णय लिया है, जिसमें मंडी जिला के 14 स्कूल शामिल हैं। इन दिनों यह सारी औपचारिकताएं चल रही हैं क्योंकि अगले शैक्षणिक सत्र से इस प्रणाल को लागू करना है। शिक्षा विभाग ने इसके लिए इन स्कूलों में तैनात शिक्षकों को ट्रेनिंग देने की योजना भी तैयार कर ली है। ट्रेनिंग लेने वाले शिक्षकों का पांच वर्षों तक तबादला नहीं होगा और वे उसी स्कूल में तैनात रहेंगे। उच्च शिक्षा उपनिदेशक यशवीर धीमान ने बताया कि पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव होगा और उसी के बारे में शिक्षकों को 50 दिनों की ट्रेनिंग दी जाएगी। जल्द ही इसका शेड्यूल जारी किया जाएगा। वहीं अगर शिक्षकों और विद्यार्थियों की बात करें तो इनमें सीबीएसई पाठ्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। यह पहला मौका होगा जब सरकारी स्कूलों के बच्चों को कम खर्चे में सीबीएसई बोर्ड के तहत पढ़ाई करने का मौका मिलेगा।