पंडोह डैम से लेकर देहरा तक ब्यास नदी के किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए अब पहली बार डैम ब्रेक एनालिसिस और इमरजेंसी एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। बीबीएमबी प्रबंधन इस योजना को आईआईटी रुड़की के आईसीईडी सेंटर की मदद से तैयार कर रहा है। इसके तहत ब्यास नदी के करीब 135 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में संभावित प्रभावित लोगों और उनकी संपत्तियों को चिन्हित किया जाएगा। इमरजेंसी एक्शन प्लान के तहत नदी किनारे के क्षेत्रों को खतरे के स्तर के आधार पर ग्रीन, ब्लू और रेड जोन में बांटा जाएगा। ग्रीन जोन: इसमें ऐसे क्षेत्र शामिल होंगे, जहां सामान्य स्थिति में नदी का पानी पहुंचता है और तत्काल खतरे की स्थिति नहीं होती। ब्लू जोन: इस क्षेत्र में सामान्य से अधिक पानी छोड़े जाने पर खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को संभावित जोखिम के आधार पर चिन्हित किया जाएगा। रेड जोन: यह सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र होगा। पंडोह डैम से अत्यधिक पानी छोड़े जाने या फ्लैश फ्लड और बादल फटने जैसी स्थिति में जिन क्षेत्रों के प्रभावित होने की आशंका होगी, उन्हें रेड जोन में रखा जाएगा। बीबीएमबी के अनुसार सिर्फ नदी किनारे रहने वाले लोगों की पहचान ही नहीं की जाएगी, बल्कि पानी की जद में आने वाली उनकी अन्य संपत्तियों को भी चिन्हित किया जाएगा। इससे आपात स्थिति में यह पता लगाने में आसानी होगी कि किस क्षेत्र में कितने लोग और कौन-कौन सी संपत्तियां संभावित रूप से प्रभावित हो सकती हैं। बीबीएमबी पंडोह के अतिरिक्त अधीक्षण अभियंता ई. चंद्रमणी शर्मा ने बताया कि संभावित प्रभावित लोगों के पहले से चिन्हित होने से आपात स्थिति में उन्हें सूचना देने और समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद मिलेगी। बीबीएमबी प्रबंधन के अनुसार पानी छोड़ने से पहले मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों के प्रशासन को सूचना दी जाती है। प्रस्तावित इमरजेंसी एक्शन प्लान के बाद संभावित प्रभावित लोगों की पहचान पहले से होने के कारण उन्हें सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। आपात स्थिति में सूचना सीधे लोगों तक पहुंचाने के लिए बीबीएमबी संभावित प्रभावित लोगों के मोबाइल नंबरों का डाटा तैयार करेगा। जरूरत पड़ने पर प्रशासन को सूचना देने के साथ-साथ संबंधित लोगों को व्यक्तिगत तौर पर संदेश भेजकर भी अलर्ट किया जा सकेगा। बीबीएमबी के अनुसार पूरा प्रस्ताव तीन हिस्सों में तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव का पहला भाग तैयार हो चुका है और इसी के आधार पर दूसरे हिस्से पर काम चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार अगले छह महीनों में ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार होने की उम्मीद है। इस योजना का उद्देश्य पंडोह डैम से देहरा तक ब्यास नदी के संभावित प्रभावित क्षेत्रों और लोगों की पहले से पहचान कर आपात स्थिति में चेतावनी, सूचना और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था को बेहतर बनाना है।