सोमवार को आईआईटी मंडी ने अपना 16 वर्षों का सफर पूरा करते हुए 17वां स्थापना दिवस बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया। समारोह में इंफोसिस लिमिटेड के सह संस्थापक पद्म भूषण क्रिस गोपालकृष्णन ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। संस्थान की तरफ से निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने उन्हें शॉल, टोपी और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में इंफोसिस लिमिटेड के सह संस्थापक पद्म भूषण क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि आज एआई एक नई तकनीक के रूप में उभर कर सामने आया है। इसके सही इस्तेमाल के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है तभी हम इसका सही इस्तेमाल कर पाएंगे। यह एक ऐसी तकनीक है जिसके सही इस्तेमाल की जानकारी हो तो यह हम सभी के लिए लाभदायक ही साबित होगी। सेना सहित सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी इस तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह से आगे बढ़ रहा है, उसे देखकर यही लगता है कि 2047 में भारत को विकसित होने से कोई नहीं रोक सकता। आईआईटी मंडी के डायरेक्टर प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि किसी भी संस्थान का 16 वर्षों का सफर काफी मायने रखता है। इसके बाद नवयौवन की शुरूआत होती है। संस्थान के सभी लोगों का यही प्रयास रहेगा कि आईआईटी मंडी का नवयौवन हमेशा बरकरार रहे और यह संस्थान कभी भी बूढ़ा न हो। हमेशा युवा अवस्था में रहकर देश निर्माण में अपना योगदान देता रहे। इस मौके पर आईआईटी मंडी के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर टीमोथी ए गोंजाल्विस, बनरास हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजित कुमार चतुर्वेदी, छत्रपति शाहु महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक, स्टैनफोर्ड रोबोटिक्स लैब अमेरिका के निदेशक प्रोफेसर ओसामा खतीब अन्य लोग भी मौजूद रहे। इस दौरान वर्ष भर संस्थान की विभिन्न गतिविधियों में अव्वल रहे मेधावियों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया।