मंडी जिला के सराज घाटी के चेत में अनोखे रूप से बूढ़ी दिवाली पर्व मनाया जाता है। मंगलवार रात घाटी के चेत गांव में लोग आग के मशाल लेकर जब नृत्य करने लगे तो पूरा गांव बूढ़ी दिवाली के जश्न में झूम उठा। वैदिक काल से आज भी पुरातन परंपरा का निर्वाह किया जाता है। इस पर्व में लोगों की पुरातन संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। प्रकाशोत्सव के प्रतीक के तौर पर यहां पर मशालें जलाई जाती हैं, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर लोग झूम उठते हैं। अधिवक्ता एवं समाजसेवी हेम सिंह ठाकुर बताते हैं कि यह पर्व वैदिक काल से चला आ रहा है। इसका वर्णन ऋग्वेद में भी मिलता है।