बंजार घाटी के तिंदर गांव में फाल्गुन सक्रांति को भगवान विष्णु नारायण को समर्पित प्राचीनतम मुखौटा उत्सव (फागली) मनाया गया। जिसमें देवता की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पारंपरिक मुखौटा नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए। आजकल तीर्थन घाटी में मुखौटा उत्सव फागली की धूम मची हुई है। यहां दूरदराज क्षेत्रों के हर गांव में यह पर्व तीन दिन तक मनाया जाता है। तिन्दर गांव में मनाए गए इस उत्सव के दौरान अतिथियों को पारंपरिक व्यंजन चिलडू परोसे गए। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और इस प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया। स्थानीय लोगों का मानना है कि फागली उत्सव से गांव में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है तथा नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है।