लंका दहन की परंपरा के साथ ही शनिवार को सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का समापन हो गया। दशहरा के अंतिम दिन भगवान रघुनाथ ने रथ में सवार होकर लंका पर चढ़ाई की। भगवान रघुनाथ का रथ खींचने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। इसके बाद भगवान रघुनाथ अपने देवालय सुल्तानुपर के लिए रवाना हो गए। वहीं, देवी-देवता भी अपने देवालयों की ओर प्रस्थान कर गए। रथयात्रा में 40 से अधिक देवी-देवता लाव-लश्कर के साथ शामिल हुए। लंका दहन की परंपरा का राजपरिवार के लोगों ने लंकाबेकर स्थित एक स्थान पर निर्वहन किया। 364 सालों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करने के बाद शाम करीब 5:00 बजे भगवान रघुनाथ पालकी में अपने देवालय सुल्तानपुर के लिए रवाना हुए। अठारह करडू की सौह रघुनाथ की नगरी में अब अगले साल तक देवी-देवताओं की मधुर ध्वनि नहीं बजेगी।