बैसाखी के पावन अवसर पर शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में इस बार आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि सारे पुराने रिकॉर्ड टूट गए। शनिवार और रविवार की छुट्टियों के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यहां उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर मार्ग पर हजारों की कतारें देखी गईं, जो गत देर रात तक जारी रहीं। श्रद्धालु "जय माता दी" के जयकारों के साथ दर्शन की लंबी प्रतीक्षा करते नजर आए। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा कर्मचारियों को पूरी मुस्तैदी से डटे रहना पड़ा। भीड़ को संभालने में जहां प्रशासन को पसीना बहाना पड़ा, वहीं महिलाओं और बुज़ुर्गों को दर्शन में कई बार असुविधा का सामना भी करना पड़ा। गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने अस्थायी टेंट, ठंडे पानी की प्याऊ और छाया स्थलों की व्यवस्था की। दर्शनार्थियों की सुविधा हेतु लाइनों को व्यवस्थित किया गया और मंदिर के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद निगरानी करते हुए व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखा। इस अवसर पर विशाल लंगर भी आयोजित किया गया जिसमें दिनभर भक्तों को भोजन और प्रसाद वितरित किया गया। भक्तों ने भक्ति के साथ सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम देखा। इतनी भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पर भी दबाव पड़ा। कई स्थानों पर एक किलोमीटर तक जाम की स्थिति बनी रही, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए ट्रैफिक को सुचारू रूप से बहाल किया। मंदिर के पुजारी राहुल शर्मा ने बताया कि इस बार बैसाखी मेला श्रद्धा और भक्ति का ऐतिहासिक प्रमाण बना। उन्होंने मंदिर प्रशासन, पुलिस, और स्वयंसेवकों का आभार जताया, जिन्होंने इस आयोजन को सफल और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शक्तिपीठ ज्वालामुखी में इस अद्भुत आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि मां ज्वाला के प्रति लोगों की आस्था समय के साथ और भी प्रगाढ़ होती जा रही है।