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Hamirpur: महिलाएं सीख रही चीड़ की पत्तियों को आकृति देना

अंकेश डोगरा Updated Tue, 30 Dec 2025 04:05 PM IST

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वस्त्र मंत्रालय की ओर से विशेष प्रशिक्षण शिविर शुरू किया गया है। इसी कड़ी में सलौणी में करीब 30 महिलाएं 60 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में चीड़ की पत्तियों को सुई और हाथ से आकृति देना सीख रही हैं। यह प्रशिक्षण शिविर फरवरी माह तक आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण शिविर में डिजाइनर हिना और मास्टर क्रॉप्ट पर्सन कविता महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। चीड़ की पत्तियों को पहले मात्र घास समझा जाता रहा है, लेकिन अब इसका प्रयोग महिलाएं अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए कर रही हैं। यह महिलाएं चीड़ व धागे से आभूषण बनाना सीख रही हैं बल्कि चीड़ की पत्तियों से रोटी बॉक्स, टोकरी, टैंपल टोकरी, कान के झूमके, हाथ के कड़े, गुड़िया का पहनावा आदि बनाना सीख रही हैं। बाजार में इन डिजाइन वाली टोकरियों की काफी अधिक मांग बढ़ गई है। चीड़ की पत्तियों से बने उत्पाद पर्यावरण के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। पूर्व में इन चीड़ की पत्तियों को आग के हवाले कर दिया जाता था जिसके कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचता था । ऐसे में महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से बने उत्पाद बनाने की कला सिखाई जा रही है। इस कला को सीखने के बाद महिलाएं हर माह दस से 15 हजार रुपये कमा सकती हैं। मास्टर क्रॉप्ट पर्सन (एमसीपी) कविता ने बताया कि इस शिविर में 30 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं तथा प्रशिक्षण के बाद इन महिलाओं को प्रमाण पत्र भी वितरित किए जाएंगे।

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