राधा अष्टमी के पावन पर्व पर त्रिलोचन महादेव के वंशज शिव चेलों ने डल झील की परिक्रमा कर उसे तोड़ने (पार करने) की परंपरा निभाई। इसके बाद मंगलवार रात 11 बजकर 13 मिनट से शाही स्नान का शुभ मुहूर्त शुरू हुआ। हालांकि, शिव चेलों के डल तोड़ने के साथ ही श्रद्धालुओं ने पवित्र डल में डुबकी लगाने और पवित्र कैलाश के दर्शन कर वापसी करनी शुरू कर दी। इस बार राधा अष्टमी के शाही स्नान का शुभ मुहूर्त मंगलवार रात 11 बजकर 13 मिनट पर शुरू हुआ। यह बुधवार रात 11 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। शाही स्नान के लिए करीब 60 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र डल, गौरीकुंड में डेरा जमाए रखा।