यमुनानगर में निजी स्कूलों का ध्यान केवल अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने की तरफ है। फिर भी वह बच्चों की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य अनिल लाठर ने मंगलवार को शहर के तीन सबसे बड़े स्कूलों में में अचानक पहुंच कर स्कूल बसों की जांच की। तीनों ही स्कूलों में बसें मानकों पर खरी नहीं उतरी। इस दौरान स्वामी विवेकानंद स्कूल सेक्टर-17 की दो बसों को इंपाउंड व चार के चालान किए गए। संत थॉमस स्कूल जगाधरी की दो बसों का चालान किया गया। वहीं एसडी पब्लिक स्कूल जगाधरी की चार स्कूल बसों के चालान किए गए। यह बसें कागजों में फिट घोषित हो रखी हैं, परंतु हकीकत कुछ और ही है। पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस जगाधरी में पहुंचे सदस्य अनिल लाठर सबसे पहले संत थॉमस स्कूल जगाधरी में पहुंचे। यहां बस को स्टार्ट करवा कर हॉर्न बजवाया। हॉर्न बजते ही आसपास खड़े अधिकारी व स्टाफ सब दहल गए। क्योंकि प्रेशर हॉर्न की आवाज बहुत ज्यादा थी। जिस पर चार बसों चालान किया गया। स्कूल बसों में आग बुझाने के लिए रखे सिलिंडर खाली मिले या फिर उन पर तारीख अंकित नहीं थी। एक बस में तो सिलिंडर को तार से बांधा गया था। फर्स्ट एड बॉक्स में रखी दवाइयां एक्सपायरी डेट की मिली। एक बस के फर्स्ट एड बॉक्स में तो मच्छर मारने की गुडनाइट और माचिस मिली। डिटोल की शीशी भी खाली मिलीं। बसों में लगे सीसीटीवी का बैकअप नहीं मिला। दो बसें जब्त, आठ बसों के चालान: इसके अनिल लाठर समस्त विभागों के अधिकारियों के साथ स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल में पहुंचे। जहां जांच के बाद दो बसों को जब्त कर लिया गया। यहां एक बस के अगले पहिये में लगा नट बोल्ट टूटा हुआ था। प्रेशर हॉर्न भी लगे थे। साथ ही फर्स्ट एड बॉक्स में दवाइयां नहीं मिली। सिलिंडरों पर रिफलिंग की तारीख नहीं थी। इतना ही नहीं बसों में स्पीड गवर्नर भी नहीं थे। इसलिए चार बसों के चालान भी किए गए। इसके बाद जगाधरी में एसडी पब्लिक स्कूल में बसों की जांच की गई। यहां एक बस की हालत तो बहुत ज्यादा खराब मिली, जो चलने लायक भी नहीं थी। बसों में प्रेशर हॉर्न लगे मिले। बसों के वाइजर नहीं चल रहे थे। चालकों-परिचालकों के पास आई कार्ड नहीं था। जिस कारण चार बसों के चालान किए गए। सभी स्कूलों पर लागू होते हैं नियम: अनिल लाठर राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य अनिल लाठर ने बताया कि सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के नियम सभी निजी स्कूलों पर लागू होते हैं। फिर वह चाहे हरियाणा बोर्ड से हो या फिर सीबीएसई से। बसों में कई तरह की खामियां मिली हैं। जिन्हें दूर करने के लिए स्कूलों को समय दिया है। कई बसों के चालान भी किए गए हैं।