क्षेत्र का गांव कथूरा खेल प्रतिभाओं की धरती के रूप में देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। युवाओं को नशे से दूर रखने और खेलों से जोड़ने के लिए गांव में खेल नर्सरी, पांच खेल मैदान और कई पारंपरिक अखाड़े मौजूद हैं। यही कारण है कि यहां खेलों की संस्कृति पीढ़ियों से मजबूत बनी हुई है और लगातार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं। गांव में खेलों की परंपरा वर्षों पुरानी है, लेकिन इसे नई पहचान वर्ष 1990 में मिली। उस वर्ष चीन में आयोजित एशियाई खेलों में गांव के ओमप्रकाश नरवाल भारतीय कबड्डी टीम का हिस्सा बने थे। भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। वर्तमान में ओमप्रकाश नरवाल पुलिस विभाग में आईजी के पद पर कार्यरत हैं। उनकी उपलब्धि से प्रेरित होकर गांव में कबड्डी का ऐसा माहौल बना कि कथूरा देश के प्रमुख कबड्डी केंद्रों में शामिल हो गया। गांव की इसी खेल परंपरा से निकले कई खिलाड़ी और खेल अधिकारी आज महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। शमशेर नरवाल करनाल में डीएसपी, सोनू नरवाल हरियाणा पुलिस में डीएसपी, जगदीश नरवाल सीआईएसएफ में इंस्पेक्टर एवं कबड्डी कोच तथा सुरजीत नरवाल खेल विभाग में खेल उप निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। कथूरा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि वर्ष 1994 को छोड़कर लगभग हर एशियाई खेलों में भारतीय कबड्डी टीम में गांव का एक या दो खिलाड़ी शामिल रहा। खास बात यह भी रही कि जब-जब कथूरा के खिलाड़ी भारतीय टीम का हिस्सा बने, तब-तब टीम स्वर्ण पदक जीतकर लौटी। यह उपलब्धि गांव की खेल प्रतिभा और समर्पण को दर्शाती है। कबड्डी खिलाड़ी संदीप नरवाल ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए हरियाणा का सर्वोच्च खेल सम्मान भीम अवार्ड और देश का प्रतिष्ठित अर्जुन अवार्ड हासिल किया। वहीं मनीष नरवाल ने जन्म से दाहिने हाथ में दिव्यांगता होने के बावजूद निशानेबाजी में इतिहास रचते हुए पैरालंपिक स्वर्ण पदक जीता और देश का नाम विश्वभर में रोशन किया। मनीष नरवाल को भी अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। अलग-अलग खेलों में गांव के दो खिलाड़ियों का अर्जुन अवार्ड से सम्मानित होना कथूरा के लिए गौरव की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। आज कथूरा की पहचान केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेलों की ऐसी धरती बन चुका है जहां से लगातार अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय पदकों की संख्या के मामले में भी कथूरा हरियाणा के अग्रणी गांवों में गिना जाता है और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।