भारतीय किसान नौजवान यूनियन के आह्वान पर किसानों ने किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के अनशन को 100 दिन पूरे होने व न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सहित 12 सूत्रीय मांगों को लेकर रोष जताया। किसानों ने गोहाना रोड स्थित लघु सचिवालय के पास धरना स्थल पर एक दिन सांकेतिक धरना देकर नारेबाजी की। किसानों ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की हितैषी होने का दावा करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि उन्होंने किसानों के लिए कई कार्य किए, जबकि कृषि प्रधान देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसान नेता डल्लेवाल किसानों के हक के लिए 100 दिन से धरने पर बैठकर मौत के नजदीक हैं। किसानों को बार-बार बैठकों का लालच दिया जा रहा है, जबकि उन्हें लगता कि किसान अब भी किसानों के साथ कुछ बड़ा करना चाहती है। जब सरकार के पास इतने आईएएस अधिकारी व कृषि विशेषज्ञ हैं तो जल्द वार्ता का समय दिया जाए। किसानों को लगता है कि सरकार अब भी किसानों के साथ बड़ा धोखा करने के लिए तैयार है। भविष्य में भी किसान नेताओं का जो आदेश होगा, उस पर कार्य किया जाएगा। सरकार की कैसी सोच है कि एक बुजुर्ग आदमी किसानों के हक के लिए लंबे समय से आमरण अनशन पर बैठा है। इसमें परमात्मा की ही मेहरबानी है, लेकिन सरकार अपने वादों पर टस से मस नहीं हो रही है। सरकार को जल्द किसानों की मांगों पर कदम उठाना चाहिए। किसान लिखित में भी वादा कर चुकी है कि जल्द कमेटी बनाकर किसानों की मांगों को पूरा किया जाएगा। दो साल इंतजार करने के बाद ही आंदोलन खड़ा किया गया था। जगजीत सिंह डल्लेवाल भी किसानों की मांगों पर ही अनशन पर बैठे हैं। आज पूरे देश में 100-100 किसानों का धरना दिया गया है। धरने का यही उद्देश्य है कि किसान एक हैं, ताकि किसानों की मांगों को जल्द पूरा किया जा सके। किसानों की सरकार से कोई नाराजगी नहीं है, लेकिन उनसे किए गए वादों को जल्द पूरा किया जाए।