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रोहतक में प्रदेश के दंत चिकित्सकों ने सीखा कृत्रिम जबड़ा बनाना

Naveen Updated Sun, 31 May 2026 03:12 PM IST

दंत विज्ञान स्नातकोत्तर संस्थान (पीजीआडीएस) में रविवार को दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। संस्थान में दंत चिकित्सकों को प्राकृतिक जबड़ा बनाने की जानकारी दी गई। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से 155 चिकित्सकों ने पंजीकरण कराया है। दंत महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मनु राठी ने कहा कि संस्थान में कृत्रिम जबड़ा बनाने का काम किया जा रहा है। इसके अलावा नाक, कान, होंठ, गला, पसलियां व अन्य कृत्रिम अंग बनाए जा रहे हैं। इससे मरीजों को बेहतर इलाज व राहत मिल पा रही है। प्रदेश के दंत चिकित्सकों को यही तकनीक सिखाई जा रही है। इससे वह अपने यहां कृत्रिम अंग बना कर मरीजों को राहत पहुंचा सकेंगे। इसके अलावा संस्थान में एआई तकनीक का भी बेहतर उपयोग किया जा रहा है। इससे मरीजों का इलाज आसान हुआ है। नई तकनीक के जरिए बुजुर्ग मरीज को घर बैठे सलाह दी जा रही है। इसके लिए चैट बॉक्स के जरिए मरीजों से संपर्क किया जा रहा है।

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