पीडब्ल्यूडी ने बरसत रोड पर किसानों को कब्जा देने के बाद शनिवार को दूसरे दिन कोई विकल्प नहीं तलाशा। ऐसे में दो सेक्टरों समेत 18 कॉलोनी व गांवों के लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। वाहन चालक एक लेन से होकर जा रहे हैं। बरसत रोड के संजय गुप्ता ने बताया कि बरसत रोड के आसपास पहले खेत होते थे। पीडब्ल्यूडी ने यहां से सड़क निकाल दी। उस समय नोटिफिकेशन नहीं किया और न ही सीजरा दिखाया। उनके पिता रामेश्वर ने 1988-89 में जमीन की निशानदेही कराई। उनकी छह बिस्वे और छह बिस्वांसी यानी करीब 320 गज जमीन बरसत रोड में मिली। जबकि उनकी जमीन अधिगृहण नहीं की थी। उस समय कोर्ट में जमीन वापस कराने या मुआवजा दिलाने का केस दायर कर दिया। वे 1995 में केस जीत गए और उनके पिता के नाम जमीन की डिग्री कर दी गई। पीडब्ल्यूडी ने दोनों में से कुछ भी नहीं करने पर डिग्री अमल में कराने की अपील दायर की। उनकी तरफ से एडवोकेट महेंद्र सिंह घनघस ने पक्ष रखा। उनके पिता आखिरी सांस तक जमीन की लड़ाई लड़ते रहे। आज उनकी तीसरी पीढ़ी लड़ाई लड़ रही है। सीजेएम महेंद्र सिंह की कोर्ट ने 21 अगस्त को उनके हक में फैसला देते हुए पीडब्ल्यूडी को कब्जा देने के आदेश दिए थे।