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पानीपत के सुताना में 103 वर्ष की सबसे बुजुर्ग महिला आशी देवी का निधन

सुताना की सबसे बुजुर्ग महिला आशी देवी का 103 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे अपने पीछे तीन बेटे और तीन बेटी समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गईं। उनकी 13वीं की रस्म क्रिया 21 जनवरी को गांव में की रखी है। उनके पौत्र सुशील कुमार यमुनानगर में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर हैं। परिजनों का दावा है कि वे आज तक अस्पताल नहीं गई। उनको 12 जनवरी को ह्रदयाघात होने पर पहली और आखिरी बार अस्पताल ले जाया गया था। उन्होंने देश को गुलामी की बेड़ियों से आजाद होते और आज शिखर पहुंचते देखा है। बड़े बेटे कर्ण सिंह ने बताया कि उनकी माता आशी देवी की उम्र 103 वर्ष की थी। उनको 12 जनवरी को ह्रदयाघात हुआ। वे उनको शहर के एक अस्पताल में ले गए। चिकित्सकों ने उनको मृत घोषित कर दिया। परिवार ने उनको 13 जनवरी को अंतिम विदाई दी। करण सिंह ने बताया कि उनकी माता को इस उम्र में भी आंखों से पूरी तरह दिखाई देता था और याददाश्त भी पूरी थी। वे हमेशा साधारण खाना पसंद करती थी और ग्रामीण जीवनशैली में रहना पसंद था। वे हमेशा खुश रहती थी और हष्ट पुष्ट थी। उन्होंने अपने जीवन में कभी दवा नहीं ली और न ही कभी अस्पताल गई थी। वे उनको अच्छा खाने की सलाह देती थी। पति की मौत के बाद परिवार को संभाला कर्ण सिंह ने बताया कि उनके पिता का निधन 1982 में हो गया था। उनकी मां आशी देवी ने परिवार की जिम्मेदारी को संभाला। उन्होंने घर से लेकर खेत तक काम किया। तीनों बेटों कर्ण सिंह, बलबीर सिंह और राजपाल सिंह का पालना किया। उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके एक पौते सुशील कुमार एचसीएस हैं। वे अब यमुनानगर में जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी हैं। महिलाएं आती थी सलाह लेने कर्ण सिंह ने बताया कि उनकी माता के पास गांव की महिलाएं सलाह लेने आती थी। वे शादी और ब्याह से संबंधित और रीति रिवाज की जानकारी लेने आती थी। इसके साथ त्योहारों व अन्य पारिवारिक मामलों की जानकारी लेने आते थे।

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