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पंचकूला में नई मदर एंड चाइल्ड केयर बिल्डिंग में लिफ्ट के दरवाजे पर फर्श टूटा, फाल्स सीलिंग गिरी

पंचकूला सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल की नई मदर एंड चाइल्ड केयर बिल्डिंग में पांचवीं मंजिल पर फाल्स सीलिंग का एक हिस्सा गिर गया और लिफ्ट के सामने फर्श का पत्थर टूटकर गिर गया। गनीमत रही कि दोनों घटनाओं के समय वहां कोई मरीज या परिजन मौजूद नहीं था। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस नई इमारत में एक तरफ निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मरीज कई हफ्तों से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। भवन के शौचालयों में भी पानी नहीं आने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को बाहर से पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी प्रसव के बाद भर्ती महिलाओं और नवजात बच्चों की माताओं को हो रही है। शौचालयों में पानी नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के साथ पानी और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं सुचारु होना बेहद जरूरी है। बच्चे को गोद में लेकर शौचालय पहुंचना भी मुश्किल अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं के लिए शौचालय में पानी नहीं होना गंभीर परेशानी बन गया है। नवजात बच्चे को गोद में लेकर शौचालय तक पहुंचने वाली महिलाओं को वहां पानी नहीं मिलने से सफाई और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जूझना पड़ रहा है। परिजनों का कहना है कि पानी की कमी से अस्पताल में संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। जीरकपुर निवासी सुमन ने बताया कि अस्पताल में भर्ती प्रसूता को बार-बार पानी की जरूरत पड़ती है। शौचालय में पानी नहीं होने से परेशानी और बढ़ जाती है। नवजात बच्चे के साथ रहने वाली माताओं के लिए स्थिति और मुश्किल है। उन्होंने बताया कि बिल्डिंग में एसी भी बंद पड़े हैं। परिजन खुद कर रहे पानी का इंतजाम सेक्टर-14 निवासी कांता देखी ने बताया कि पानी नहीं आने के कारण मरीजों के साथ आए परिजन अपने स्तर पर पानी का इंतजाम कर रहे हैं। कोई घर से बोतल भरकर ला रहा है तो कोई बाहर से पानी भरकर अस्पताल पहुंच रहा है। उनका कहना है कि इलाज के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे हर समय अपने साथ पानी लेकर चलें। नई इमारत में भी पुरानी बिल्डिंग जैसी परेशानी मदर एंड चाइल्ड केयर बिल्डिंग का निर्माण गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं और नवजात बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। लेकिन नई इमारत में ही पानी जैसी मूलभूत सुविधा का संकट मरीजों की परेशानी बढ़ा रहा है। मरीजों और परिजनों का कहना है कि बेहतर सुविधाओं की उम्मीद में नई बिल्डिंग में आने के बावजूद उन्हें पुरानी इमारत जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कभी भवन में पानी टपकने की शिकायत सामने आती है तो कभी पेयजल और शौचालय की समस्या मरीजों के लिए मुसीबत बन जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई स्वास्थ्य सुविधा में पानी जैसी आवश्यक व्यवस्था तक सुचारु क्यों नहीं हो पा रही। पहले भी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल सेक्टर 14 निवासी महिला सौरभ शर्मा सेक्टर-6 सिविल अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। जनवरी 2026 में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने अस्पताल के निर्माण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। उस दौरान अस्पताल के निर्माण और फायर सेफ्टी से जुड़ी कमियां भी सामने आई थीं। अब नई मदर एंड चाइल्ड केयर बिल्डिंग में फाल्स सीलिंग गिरने, फर्श का पत्थर टूटने और कई सप्ताह से पेयजल व शौचालयों में पानी की समस्या सामने आने से अस्पताल की व्यवस्थाओं पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जल्द दूर होगी पानी की समस्या : पीएमओ पीएमओ आरएस चौहान ने बताया कि पहले पानी की पाइप सवा इंच की थी, जिसे अब सवा तीन इंच की पाइप से बदला गया है। फिलहाल 15 एचपी का पंप लगाया जा रहा है। जल्द ही पानी की समस्या का समाधान करवा दिया जाएगा। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के साथ कई बार बैठक भी हो चुकी है।

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