घर के आंगन में चहकते हुए इधर-उधर फुदकती नन्ही गौरैया अब लगभग गायब हो चुकी है। आधुनिकता के दौर में बदलते घरों के स्वरूप, लगातार पेड कटने के सिलसिले से गौरैयों का आशियाना छिन गया है। ऐसे में पलवल के कुछ लोग मिलकर गौरैया व अन्य पक्षियों को बचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। पलवल में मिशन प्रकृति बचाओ पर्यावरण सचेतक सेवा ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. आचार्य राम कुमार बघेल ओर इनकी टीम द्वारा वर्षों से प्रकृति पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न सेवा प्रयास किए जा रहे हैं। विलुप्त होती गौरेया जिसे घरेलू चिड़िया के नाम से भी जानते थे। आज शहरीकरण के चलते बहुत कम दिखाई देती है। ऐसे में डॉ. आचार्य राम कुमार बघेल के घर पर सैंकड़ों गौरेया रहती हैं। वह नियमित उनके लिए दाना-पानी की व्यवस्था करते हैं। उनके घर के आस-पास निकलते हुए लोगों को चिड़ियों की मधुर आवाज सुनाई देती हैं। लोग चिड़ियाघर के नाम से उनके निवास पर गौरेया को देखने जाते हैं। उन्होंने बताया कि यह हमारे परिवार के सदस्य और मित्र पक्षी हैं। पलवल में मास्टर मनिकचन्द, मास्टर थानसिंह, अमरपाल, ईश्वरराज, गजेंद्र, बच्चे शिवम ओर कार्तिकेय आदि लोग पक्षी मित्र बनकर पक्षियों को बचाने के लिए काम कर रहे हैं। पंचवटी मंदिर में आज भी है पक्षियों का आशियाना पलवल शहर के पंचवटी हनुमान मंदिर में मंदिर की तरफ से बहुच सुंदर वाटिका बनाई गई है। इसमें सैकड़ों पेड़ लगे हुए हैं, यहां पर पूरे दिन पक्षियों की मधुर आवाज सुनाई पड़ती है। मंदिर में सेवा देने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि यहां पर कई प्रकार की चिड़िया व अन्य पक्षी रहते हैं मंदिर की तरफ से उनके लिए दाना व पानी नियमित रूप से दिया जाता है वहीं मंदिर में गौ सेवा के लिए भी गौशाला खोली गई है यहां पर गौ सेवा की जाती है।