उत्तर पश्चिम रेलवे में रेलवे सुरक्षा बल द्वारा सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं से जुड़े कई अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा, जरूरतमंदों के पुनर्वास और यात्रियों की सहायता का कार्य किया जा रहा है। “ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” के तहत इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में मार्च के प्रथम सप्ताहांत तक रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों से 662 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। ये बच्चे अपने परिवार से बिछड़ गए थे या घर से भागकर रेलवे स्टेशन पहुंच गए थे। आरपीएफ ने इन्हें चाइल्ड हेल्पलाइन और सामाजिक संस्थाओं की मदद से उनके परिजनों को सौंपा। वहीं “ऑपरेशन डिग्निटी” के तहत रेलवे स्टेशनों पर रह रहे बेसहारा लोगों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास के लिए भेजा गया। इस अभियान में 288 पुरुषों और 170 महिलाओं को अपना घर आश्रम, मेरी पहल संस्थान और मुख्यमंत्री पुनर्वास योजना के तहत सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। “ऑपरेशन अमानत” के तहत आरपीएफ कर्मियों ने यात्रियों के खोए हुए सामान को खोजकर लौटाने का कार्य किया। इस अभियान के दौरान 1829 यात्रियों को करीब 3 करोड़ 60 लाख 73 हजार रुपये मूल्य का सामान वापस सौंपा गया। इसके अलावा “ऑपरेशन जीवन रक्षा” के तहत चलती ट्रेन में चढ़ते-उतरते समय दुर्घटना की आशंका वाले 29 यात्रियों की जान बचाई गई। वहीं “मेरी सहेली योजना” के अंतर्गत महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए 16 ट्रेनों में महिला आरपीएफ टीमों द्वारा 1 लाख 73 हजार 256 महिला यात्रियों को सहायता प्रदान की गई। आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा और सेवा के लिए भविष्य में भी ऐसे अभियान निरंतर जारी रहेंगे।