शहर स्थित उप नागरिक अस्पताल को नागरिक अस्पताल का दर्जा मिल गया है, लेकिन सुविधाएं अभी भी सीएचसी स्तर की ही हैं। उपचार के लिए आने वाले मरीज बैठने के लिए पत्थर ढूंढकर लाते हैं और अस्पताल प्रशासन को पुराने भवन में बजट नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते अब अस्पताल दानदाताओं की बाट जोह रहा है। बता दें कि अस्पताल भवन में मरीजों के बैठने के लिए नाममात्र ही कुर्सियां हैं। मरीजों को बैठने के लिए भी पत्थरों की तलाश करनी पड़ती है और तब जाकर वे बैठ पाते हैं। कुर्सियां महज नाम की ही रखी गई और पांच मरीज आते ही कुर्सियां भर जाती हैं। अस्तपाल के पीपीपी ब्लॉक में सबसे अधिक कुर्सियाें की कमी खल रही है। यहां पर प्रतिदिन 50 से अधिक महिलाएं जांच के लिए आती हैं और आशा वर्कर भी यहां पर आती हैं। इस खंड में बैठने के लिए केवल 8 सीमेंटेड बेंच डाली गई हैं। इन पर महिलाएं बैठ जाती हैं, लेकिन अधिकतर महिलाएं खड़ी रहती हैं और कोई पत्थरों की व्यवस्था कर उन पर बैठ जाती हैं। प्रतिदिन का यही रूटीन रहता है और आशा वर्कर भी पत्थरों पर बैठकर ही गर्भवती महिलाओं व परिवार नियोजन की महिलाओं के फार्म भरवाती हैं। वहीं, हड्डी रोग विशेषज्ञ कक्ष के पास तो कुर्सियां ही नहीं हैं। यहां पर मरीजों को खड़े रहकर या पत्थर पर बैठकर ही अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। यहां मरीजों के बैठने के लिए किसी प्रकार की सुविधा नहीं है। अस्पताल का भवन पुराना होने के कारण बजट नहीं मिल पा रहा है और नए भवन का निर्माण कार्य भी अभी पूरा नहीं हुआ है। इसके चलते अस्पताल प्रशासन दानदाताओं की बाट जोह रहा है ताकि कोई दानदाता बेंच भेंट करे तो मरीजों के लिए बैठने की व्यवस्था हो सके।