किसी भी अचानक आने वाली आपदा या आपातकालीन स्थिति के दौरान हम कितने सजग और तैयार हैं इसकी जमीनी हकीकत परखने के लिए शुक्रवार को जिला न्यायालय परिसर में एक वृहद मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास के जरिए न केवल पुलिस और फायर ब्रिगेड की तत्परता को जांचा गया बल्कि रेड क्रॉस और आपदा प्रबंधन की टीमों के बीच समन्वय का भी बारीकी से निरीक्षण किया गया। मॉक ड्रिल का पूरा घटनाक्रम बिल्कुल किसी वास्तविक आपात स्थिति की तरह तैयार किया गया था। जैसे ही जिला न्यायालय परिसर की एक बिल्डिंग की पहली मंजिल पर आग लगने की सूचना मिली, देखते ही देखते पूरा प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सायरन बजाती हुई मौके पर पहुंचीं और दमकल कर्मियों ने मोर्चा संभाला। साथ ही पुलिस और रेड क्रॉस की टीमें भी तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गईं। इस ड्रिल के दौरान बिल्डिंग में फंसे लोगों को सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर नीचे लाया गया और वहां मौजूद रेड क्रॉस के वॉलंटियर्स ने उन्हें प्राथमिक उपचार देना शुरू किया। इस मौके पर मौजूद डीएसपी सुरेश कुमार ने पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली और सभी टीमों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने टीमों के रिस्पांस टाइम और काम करने के तरीके का अवलोकन किया। अभ्यास के समापन पर उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य कमियों को पहचानना और असल संकट के समय बिना घबराए तालमेल के साथ काम करना है।