प्रदेश के मशहूर हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा के फर्जी हस्ताक्षर कर प्रापर्टी में हेराफरी करवाने का मामला सामने आया है। इस मामले के बारे में पता चलने के बाद कवि सुरेंद्र शर्मा ने डीसी, एसपी और पुलिस महानिरीक्षक को शिकायत भी दी है। जिस पर पुलिस ने कार्रवाई भी शुरू कर दी है। इसी को लेकर कवि सुरेंद्र शर्मा ने शुक्रवार को एक निजी होटल में एक प्रेसवार्ता भी बुलाई। हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि उनका नांगल चौधरी में जन्म हुआ था। लेकिन जन्म के कुछ समय बाद उनके पिता दिल्ली लेकर चले गए थे। हालांकि स्कूल की छुट्टियों में वह अक्सर अपने गांव में आते थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने गांव में धर्मशाला बनाई थी। इसके बाद उन्होंने धर्मशाला की ऊपरी मंजिल का निर्माण करवाया था। अब इस धर्मशाला का प्रयोग स्कूल के रूप में किया जा रहा है। लेकिन उनके फर्जी हस्ताक्षर कर प्रॉपर्टी बेच दी गई। जब उन्हें पता चला कि उनके फर्जी हस्ताक्षर के आधार पर एक वकालतनामा लगाया गया। इस वकालतनामा का इस्तेमाल कहां-कहां हुआ है। इसके लिए पुलिस में शिकायत दी है। दो बार जारी किए गए समनों पर किए फर्जी हस्ताक्षर: जब कवि सुरेंद्र शर्मा को उनके फर्जी हस्ताक्षर के बारे में पता चला तो एडवोकेट हेमंत शर्मा से इस मामले में निरीक्षण करवाया। जिसमें पता चला कि परिवार की प्रॉपर्टी की बंटवारा (तकसीम) के मामले में सहायक कलेक्टर प्रथम श्रेणी नांगल चौधरी ने पांच अगस्त 2010 को एप्लीकेशन लगाई गई थी। 30 नवंबर 2010 को फैसला कर दिया गया। इसमें तकसीम से संबंधित दावा डालने से पहले ही वर्ष 2009 में सुरेंद्र शर्मा को समन जारी कर दिया। उन्होंने बताया कि जो समन जारी किए गए वह भी नांगल चौधरी के पते पर किए गए। ऐसे में उन्हें नांगल चौधरी आए ही बहुत दिन हो गया है। वहीं सुरेंद्र शर्मा को 16 नवंबर 2009 व 18 नवंबर 2009 को समन तामिल दर्शाए गए हैं। इन दोनों समनों पर सुरेंद्र शर्मा के फर्जी हस्ताक्षर है। इतना ही नहीं आरोपियों ने उनके रिश्तेदारों के भी हस्ताक्षर फर्जी किए हैं। सरेली गांव की उनकी जमीन पर भी लिया ऋण सुरेंद्र शर्मा की सरेली में भी जमीन है, उस जमीन के रिकार्ड में भी फेरबदल कर आरोपियों ने करीब पौने चार लाख रुपये का ऋण ले लिया। अब इस मामले के उजागर होने पर एक कमेटी गठित कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।