अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के पहले दिन ब्रह्मसरोवर की छटा ढोल-नगाड़ों व सारंगी की धुनों में रंगी नजर आई। दूर-दराज से पहुंचे लोगों ने ढोल-नगाड़े की थाप पर नाचकर गीता जयंती का लुत्फ उठाया। जंगम जोगी कलाकारों ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। जोगिया सारंगी कलाकारों ने प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। कलाकारों ने पुश्तैनी परंपरा को जीवित रखने के लिए पारंपरिक भजनों की प्रस्तुति दी। सुभाष चंद, तारा राम व इस्लाम अली की टीम ने हीर रांझा की कहानियों को सारंगी की धुनों पर गाकर सुनाया। कलाकारों की प्रस्तुति को देखने के लिए ब्रह्मसरोवर के तट पर लोगों का जमावड़ा लग गया। कलाकारों ने कहा कि वह हर साल गीता जयंती महोत्सव व सूरजकुंड मेले में लोगों के सामने हरियाणवी लोक संगीत की प्रस्तुति देकर लोगों को संस्कृति से अवगत कराते हैं।