भगवान दास, करनाल। ईट-पत्थरों से बनी इमारतें समय के साथ बदल जाती हैं, लेकिन उनसे जुड़ी यादें पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जीवित रहती हैं। रामनगर स्थित प्राचीन श्री सनातन धर्म मंदिर भी ऐसी ही एक विरासत है, जिसने दशकों से हजारों लोगों की आस्था, संस्कार और जीवन के अनगिनत पड़ावों को अपने आंगन में सहेज रखा है। अब यह ऐतिहासिक भवन जल्द ही इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा, क्योंकि इसके स्थान पर एक नए, भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा। रामनगर, प्रेम नगर, शांति नगर, गांधी नगर सहित पूरे लाइन पार क्षेत्र का यह सबसे पुराना और प्रतिष्ठित मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र भी रहा है। यहां न जाने कितनी पीढ़ियों ने अपने बच्चों का पहला मुंडन कराया, विवाह से पहले भगवान का आशीर्वाद लिया, त्योहार मनाए और सुख-दुख के हर अवसर पर भगवान के सामने माथा टेका। यही कारण है कि इस मंदिर से लोगों का रिश्ता केवल आस्था का नहीं, बल्कि भावनाओं का भी है। मंदिर के पुराने भवन को विदा करना श्रद्धालुओं के लिए आसान नहीं है। कई बुजुर्गो की आंखें नम हो जाती हैं, क्योंकि इस परिसर से उनका बचपन, युवावस्था और जीवन की अनगिनत स्मृतियां जुड़ी हैं। लेकिन समय की आवश्यकता और भविष्य की सोच को देखते हुए श्रद्धालुओं ने एकमत होकर नए निर्माण का संकल्प लिया है। मंदिर सभा के प्रधान राधे श्याम बताते है कि इस मंदिर के निर्माण के समय लगभग 1962 में रामनगर के बुजुर्ग सुंदर दास अग्घी और उनकी टीम थी, जिन्होंने अपने प्रयासों से मंदिर बनवाया और मंदिर में सबसे पहले राधा कृष्ण, राम दरबार, शेरावाली, शिव परिवार, विष्णु भगवान, गणेश जी और छोटे शिवलिंग की स्थापना करवाई। उसके बाद लगभग 20 साल पहले विशाल मनकामेश्वर भगवान की स्थापना करवाई गई। वहीं श्रद्धालुओं का सपना है कि नया मंदिर अपनी भव्यता, वास्तुकला और आध्यात्मिक गरिमा के कारण पूरे क्षेत्र की पहचान बने। उनकी इच्छा है कि इसे 'स्वर्ण मंदिर' जैसी दिव्यता और आकर्षण के साथ विकसित किया जाए, ताकि यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, संस्कृति और सेवा का प्रेरणास्थल बन सके। बारात घर बना श्री सनातन धर्म मंदिर का अस्थायी धाम श्री सनातन धर्म मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य के चलते मंदिर परिसर के सामने स्थित बारात घर को अस्थायी मंदिर के रूप में विकसित किया गया है। मंदिर के पुजारी कृष्ण कुमार ने बताया कि सभी देवी-देवताओं की मूर्तियों की विधि-विधान के साथ प्राण-प्रतिष्ठा कर बारात घर में स्थापित कर दी गई हैं। अब मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने तक श्रद्धालु यहीं नियमित रूप से पूजा-अर्चना, आरती और धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के दौरान भी धार्मिक गतिविधियां पूर्ववत जारी रहेंगी, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और पूजा-पाठ में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।