जिस प्रकार नागपुर का संतरा, आगरा का पंछी पेठा, गोहाना का जलेब मशहूर है। उनसे कहीं नामचीन फिरनी जो कि हल्का फीका मिष्ठान है। पूरे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पूंडरी की फिरनी के नाम से प्रसिद्ध है। पूंडरी की फिरनी हर वर्ष पूंडरी के फिरनी बनाने वाले दुकानदारों को करोड़ों का व्यवसाय देने के अलावा नाम व प्रसिद्धि भी देती है। इस वर्ष फिरनी 200 से 250 रुपए किलोग्राम तक फिरनी बिक रही है। कृष्ण सैनी हलवाई ने बताया 500 क्विंटल तक फिरनी का कारोबार होता है जबकि इस वर्ष 700 क्विंटल तक कारोबार होने की उम्मीद है। 1 से सवा करोड़ तक हो सकती है। बता दें कि पूंडरी की फिरनी जिसके स्वाद के अंग्रेज भी एक समय कायल हुआ करते थे। पूंडरी की मशहूर फिरनी” यही वो स्लोगन है, जिसे पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के दुकानदार अपनी दुकान पर लगाकर इस मिठाई को बेचता है। सावन का महीना आते ही पूंडरी शहर का नाम लेने से ही फिरनी का स्वाद याद आने लगता है। कहा जाता है की लगभग 90 वर्षों से यहां के कारीगर फिरनी बना रहे हैं। कारीगरों व कृष्ण सैनी हलवाई का कहना है कि शुरुआत में एक-दो दुकानों में ही यह मिठाई बनाई जाती थी। लोगों का क्रेज देखकर धीरे-धीरे इसका कारोबार बढ़ता गया। बताया कि यहां का पानी इस मिठाई को ख़ास बनाता है।आज हरियाणा के कई शहरों से व्यापारी यहां से फिरनी खरीदकर अपने शहरों में बेचते हैं। 1936 में फिरनी बनाने की शुरुआत कस्बे के गांव फतेहपुर से संबंध रखने वाले स्व. हरिकिशन ब्यास ने 1936 में फिरनी बनाने की शुरुआत की थी। गांव के बीच में छोटी सी दुकान से उन्होंने फिरनी बनाने का काम शुरू किया था, जो धीरे-धीरे आगे चलकर पूरे देश में मशहूर हो गई। कहा जाता है कि उस वक्त हरिकिशन ब्यास अकेले थे, जो फिरनी बनाने का काम करते थे।अंग्रेज अधिकारी भी उनकी बनाई फिरनी के दीवाने थे।गांव में आज कोई घर ऐसा नहीं होगा जिस घर में मेहमानों के लिए फिरनी न रखी गई हो। शुगर फ्री फिरनी और रबड़ी वाला घेवर कैथल में शुगर फ्री फिरनी भी तैयार की जाती है, जिसमें मीठे की मात्रा न के बराबर होती है, जिससे शुगर के मरीज भी इसका लुत्फ उठा सकते हैं. पूंडरी की फिरनी के चर्चे तो विदेशों तक हैं, साथ ही यहां के रबड़ी वाले घेवर का भी कोई जवाब नहीं। यहां के घेवर की खासियत यह है कि ये घेवर क्रिस्पी और कम मीठा होता है। साइज में बहुत ही छोटा बनाया जाता है। घेवर के ऊपर लगी मावे की परत और रबड़ी की की नरमी घेवर को एक अलग ही जायके से भर देती है। एक महीने तक खराब नहीं होती फीकी फिरनी फिरनी बनाने वाले हलवाइयों ने बताया कि वो फीकी फिरनी को एक महीना पहले से ही बनाना शुरू कर देते हैं। जैसे-जैसे उन्हें थोक में ऑर्डर मिलते हैं, वैसे-वैसे फीकी फिरनी पर मीठा चढ़ा कर बेचा जाता है. फिरनी के स्वाद के लोग इस कदर कायल हैं कि जब भी कैथल आते हैं तो बिना फिरनी खरीदे नहीं जाते. इसका रेट पूरे पूंडरी में लगभग 280 से 300 रुपये किलो है।